UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण श्रमिकों के लिए पंजीकरण के नियमों में ढील देते हुए नई गाइडलाइन जारी की है। अब श्रमिक केवल अपने आधार कार्ड और 90 दिनों के कार्य अनुभव के प्रमाण के आधार पर बोर्ड के साथ अपना पंजीयन करा सकते हैं। प्रशासन का लक्ष्य उन श्रमिकों तक पहुँचना है, जो जानकारी के अभाव में अब तक इन लाभकारी योजनाओं से वंचित रहे हैं।
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पंजीकरण के लिए क्या है पात्रता और नई व्यवस्था?
बोर्ड ने ‘लेबर मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम’ के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सुलभ बना दिया है। 18 से 60 वर्ष के बीच का कोई भी निर्माण श्रमिक पंजीकरण के लिए पात्र है। श्रमिक ने पिछले एक वर्ष के दौरान कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य किया हो। श्रमिक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या निर्माण स्थलों पर विभाग द्वारा लगाए जा रहे विशेष कैंपों का लाभ उठा सकते हैं।
इन शानदार योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
एक बार पंजीकरण होने के बाद, श्रमिक और उनका परिवार सरकार की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं के पात्र हो जाते हैं। प्रमुख योजनाएं इस प्रकार हैं:
शिक्षा का अधिकार: ‘संत रविदास शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ और ‘अटल आवासीय विद्यालय योजना’ के तहत श्रमिकों के बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा दी जा रही है। वर्तमान में 18 मंडलों में लगभग 11 हजार बच्चे इन विद्यालयों में मुफ्त पढ़ाई कर रहे हैं।
बुढ़ापे का सहारा: ‘महात्मा गांधी पेंशन योजना’ के माध्यम से वृद्ध श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है।
स्वास्थ्य सुरक्षा: ‘जन आरोग्य योजना’ के तहत श्रमिकों और उनके परिजनों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।
पारिवारिक सहायता: ‘कन्या विवाह योजना’ के तहत बेटियों की शादी के लिए आर्थिक मदद और ‘मातृत्व शिशु बालिका मदद योजना’ के जरिए नवजात और मां की देखभाल के लिए सहायता राशि दी जाती है।
कौशल विकास: ‘कौशल विकास तकनीकी उन्नयन योजना’ के माध्यम से श्रमिकों को नई तकनीक सिखाई जाती है ताकि उनकी आय बढ़ सके।
टोल-फ्री नंबर जारी
अक्सर देखा गया है कि बिचौलिए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर भोले-भले श्रमिकों से पैसों की मांग करते हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं:
शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर: यदि कोई व्यक्ति पंजीकरण या योजना का लाभ दिलाने के बदले पैसे मांगता है, तो उसकी शिकायत सीधे 1800-180-5412 पर की जा सकती है।
अब तक की प्रगति और लक्ष्य
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 71 लाख से अधिक श्रमिक और 4.66 लाख निर्माण स्थल पंजीकृत हो चुके हैं। सरकार का संकल्प है कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक इन सुविधाओं को पहुँचाया जाए ताकि निर्माण क्षेत्र से जुड़े हर हाथ को सम्मान और सुरक्षा मिल सके।










