UP News: यूपी के अमेठी जिले में समाजवादी पार्टी के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। ऐसे में सपा विधायक महाराजी देवी के आवास के बाहर हुए हंगामे और कथित मारपीट के मामले ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। इस घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
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ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर हमला
आपको बता दें कि, सुभासपा प्रमुख और यूपी सरकार में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस पूरे मामले पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी में गैर-यादव पिछड़ो और दलितों को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। राजभर ने आरोप लगाया कि पार्टी में सम्मान और सत्ता का लाभ सीमित वर्ग को ही मिलता है, जबकि अन्य वर्गों को केवल चुनावी कार्यों तक सीमित रखा जाता है।
PDA राजनीति पर सवाल
बताते चलें कि, ओपी राजभर ने सपा की PDA राजनीति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह गया है और जमीनी स्तर पर इसका वास्तवित लाभ नहीं दिखता।
अमेठी में हुआ विवाद क्या है?
यह पूरा मामला मंगलवार रात अमेठी कोतवाली क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी का बताया जा रहा है, जहां सपा विधायक महाराजी देवी के घर के बाहर भारी हंगामा हुआ। विधायक परिवार का आरोप है कि दो स्कॉर्पियो और कई मोटरसाइकिलों से आए करीब दो दर्जन से अधिक लोगों ने गाली-गलौज की और मारपीट भी की। परिवार ने यह भी दावा किया कि जब घटना का वीडियो रिकॉर्ड करने की कोशिश की गई तो मोबाइल फोन छीन लिया गया।
पुलिस में शिकायत और जांच शुरू
इस मामले में विधायक के बेटे अनुराग प्रजापति ने अमेठी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कई लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें जय सिंह प्रताप यादव, शेर बहादुर यादव और बलराम यादव प्रमुख हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है।
सोशल मीडिया विवाद और राजनीतिक तनाव
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया से जुड़े किसी मुद्दे से हुई बताई जा रही है। हालांकि, इसे केवल सोशल मीडिया विवाद नहीं माना जा रहा, बल्कि सपा के अंदर चल रही लंबे समय से राजनीतिक खींचतान का परिणाम भी बताया जा रहा है। कुछ स्थानीय नेताओं की नाराजगी को भी इस घटना की एक बड़ी वजह माना जा रहा है, खासकर टिकट वितरण को लेकर असंतोष की चर्चा है।
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सपा नेतृत्व पर उठ रहे सवाल
इस पूरे विवाद के बाद विपक्षी दल सपा की अंदरूनी राजनीति और PDA रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं। अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि समाजवादी पार्टी नेतृत्व इस मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या आरोपियों के खिलाफ कोई संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और राजनीतिक बयानबाजी का दौर भी थमता नजर नहीं आ रहा है।










