UP News: KGMU लव जिहाद मामले के बाद एक्शन में सरकार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दिए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में कथित धर्मांतरण और 'लव जिहाद' के मामले सामने आने के बाद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देश पर 'धर्मांतरण रोकथाम सेल' गठित करने के आदेश जारी किए गए हैं। लखनऊ के KGMU में रेजिडेंट डॉक्टर रमीज की गिरफ्तारी के बाद परिसरों में सुरक्षा और चौकसी बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जून 11, 2026

UP News: उत्तर प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में धर्मांतरण और ‘लव जिहाद’ के कथित मामलों के उजागर होने के बाद राज्य सरकार और राजभवन ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में जबरन या बहला-फुसलाकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तन की रोकथाम के लिए ‘विशेष सेल’ (Anti-Conversion Cell) गठित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राजधानी लखनऊ के नामचीन चिकित्सा संस्थानों में हाल ही में सामने आईं संदिग्ध गतिविधियों और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चांसलर ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके।

विशेष विंग के गठन की प्रक्रिया तेज

बताते चले कि, राजभवन के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी (OSD) डॉ. सुधीर एम. बोबड़े द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पत्र को आधार बनाते हुए अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अमित देवगन ने एक बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी किया है। कुलपति ने विश्वविद्यालय से संबद्ध राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों को अपने-अपने परिसरों में तुरंत ‘धर्मांतरण रोकथाम सेल’ की स्थापना करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों से इस विशेष विंग के गठन की विस्तृत जानकारी और स्टेटस रिपोर्ट बेहद कम समय में उपलब्ध कराने को कहा है।

छात्रों, डॉक्टरों और कर्मचारियों पर रहेगी पैनी नजर

इस नए सरकारी आदेश के बाद प्रदेश के सभी चिकित्सा शिक्षा केंद्रों और अस्पतालों में सुरक्षा तथा निगरानी व्यवस्था को नए सिरे से पुख्ता किया जा रहा है। यह नवगठित विशेष सेल न केवल चिकित्सा छात्रों (मेडिकल स्टूडेंट्स), रेजिडेंट डॉक्टरों बल्कि गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के बीच भी धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगा। इस सेल का मुख्य उद्देश्य मेडिकल परिसरों के भीतर एक सुरक्षित, निष्पक्ष और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, परिसर में होने वाली किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर सतर्क नजर रखने, नियमों और अधिकारों की जानकारी देने तथा धर्मांतरण से जुड़ी किसी भी शिकायत पर बिना देर किए तत्काल नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की जिम्मेदारी इस सेल को सौंपी गई है।

केजीएमयू का ‘लव जिहाद’ मामला बना बड़ी वजह

आपको बता दे कि, मेडिकल कॉलेजों में इस स्तर की सख्त चौकसी बढ़ाने के पीछे हाल ही में लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) में आए गंभीर मामले हैं। बीते दिनों केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर रमीज को पुलिस ने एक हिंदू युवती को धोखे से अपने जाल में फंसाने, प्रताड़ित करने और जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपी डॉक्टर ने पहले पीड़िता को शादी का झांसा दिया और बाद में उस पर मजहब बदलने का दबाव बनाया। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से ही चिकित्सा जगत और शासन में हड़कंप मचा हुआ था, जिसके परिणाम स्वरूप अब पूरे उत्तर प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में इस प्रकार की आंतरिक सुरक्षा और एंटी-कनवर्जन सेल को अनिवार्य कर दिया गया है।