UP Election 2026: यूपी चुनाव पर मायावती का बड़ा दांव, “नहीं होगा गठबंधन, बसपा अकेले मैदान में…”

UP Election 2026: क्या मायावती का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला बदल देगा उत्तर प्रदेश का सियासी समीकरण? गठबंधन से दूरी, विरोधियों पर साजिश का आरोप और दिल्ली में बंगले को लेकर उठे सवालों के बीच बसपा प्रमुख के इस दांव के राजनीतिक मायने क्या हैं, जानिए पूरी कहानी विस्तार से।

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

फ़रवरी 18, 2026

UP Election 2026: यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती का बड़ा बयान सामने आया है, उन्होंने कहा कि पार्टी अपने दमखम पर चुनाव लड़ेगी, ठीक उसी तरह जैसे वर्ष 2007 में लड़ा था। उस समय बसपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी।

आपको बता दें कि, मायावती ने कहा कि गठबंधन को लेकर जो चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार विरोधी दल जानबूझकर इस तरह की खबरें फैलाकर पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाना चाहते हैं। उन्होंने इसे एक सुनियोजित साजिश बताया और कहा कि मीडिया में फर्जी खबरें प्रसारित कर बसपा की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

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पहले भी कर चुकी है सार्वजनिक घोषणा

आपको बता दें कि, बसपा प्रमुख ने याद दिलाया कि 9 अक्टूबर को कांशीराम की पुष्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने खुले मंच से यह घोषणा कर दी थी कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। इसके बाद भी कई अवसरों पर उन्होंने यही बात दोहराई है। इसलिए अब इस विषय पर किसी भी तरीके के बसल की आवश्यकता नहीं है।

अन्य दलों पर निशाना

मायावती ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन सभी दलों की विचारधारा संकीर्ण है और ये भीमराव आंबेडकर की सोच के अनुरूप कार्य नहीं करते। उनके अनुसार बसपा का इन दलों के साथ गठबंधन हमेशा नुकसानदायक साबित हुआ है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों से भ्रमित न हों और पूरे आत्मविश्वास के साथ संगठन को मजबूत करने में जुटे रहें। मायावती ने कहा कि सभी को “हाथी की मस्त चाल” के साथ आगे बढ़ते हुए 2027 में बसपा की सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर कार्य करना चाहिए।

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दिल्ली में बंगला आवंटन पर दी सफाई

सुरक्षा कारणों से मिला आवास

दिल्ली में नए बंगले के आवंटन को लेकर उठ रही चर्चाओं पर भी मायावती ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उनके अनुसार उन्हें पहले भी गंभीर सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा है।

1995 गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख

मायावती ने 2 जून 1995 की उस घटना का जिक्र किया जब लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस में उन पर जानलेवा हमला हुआ था। उस समय राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस हमले के पीछे तत्कालीन सत्ता पक्ष के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका थी। उस घटना के बाद, जब उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार बनी, तब केंद्र सरकार ने उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षा खतरा और बढ़ गया है, इसलिए दिल्ली में आवास का आवंटन किया गया है।

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