UP Census 2026 : दो चरणों में होगा महाअभियान, आजादी के बाद पहली बार जातिगत गणना

उत्तर प्रदेश में 2026 की जनगणना को लेकर बड़ा अपडेट! क्या आप जानते हैं कि इस बार आपके घर आने वाले अधिकारी आपसे कौन से 33 सवाल पूछेंगे? आजादी के बाद पहली बार होने जा रही जातिगत गणना का असली सच और मोबाइल ऐप के जरिए होने वाली इस हाई-टेक डिजिटल काउंटिंग की पूरी इनसाइड स्टोरी यहाँ पढ़ें।

UP Census 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 2, 2026

UP Census 2026 : उत्तर प्रदेश में भारत की 16वीं जनगणना का बिगुल बज चुका है। राज्य सरकार ने इस विशाल प्रक्रिया के लिए विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आईएएस शीतल वर्मा ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया दो महत्वपूर्ण चरणों में संपन्न होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक और व्यापक जनशक्ति का उपयोग किया जाएगा।

दो चरणों में जनगणना का विस्तृत शेड्यूल

उत्तर प्रदेश में जनगणना की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए इसे दो हिस्सों में बांटा गया है। कार्यक्रम के अनुसार, जनगणना का पहला चरण 22 मई से 20 जून 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा। इसके ठीक बाद, दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा। पहले चरण में मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जबकि दूसरा चरण व्यक्तिगत विवरणों के लिए समर्पित होगा।

प्रथम चरण: मकान सूचीकरण और सुविधाओं का आकलन

मई 2026 से शुरू होने वाले पहले चरण में ‘मकान सूचीकरण’ (House Listing) और ‘मकानों की गणना’ का कार्य किया जाएगा। इस दौरान जनगणना एजेंट घर-घर जाकर प्रत्येक मकान की स्थिति का जायजा लेंगे। इस चरण में परिवार को उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और उनकी संपत्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। यह सारा डेटा डिजिटल माध्यम से सीधे एक विशेष मोबाइल ऐप के जरिए इकट्ठा किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित हो सके।

द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना और व्यक्तिगत डेटा संग्रह

फरवरी 2027 में प्रस्तावित दूसरे चरण में वास्तविक ‘जनसंख्या गणना’ की जाएगी। इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति का विवरण दर्ज होगा। जनगणना निदेशक शीतल वर्मा के अनुसार, पहले फेज में हाउस-होल्ड लेवल डेटा (परिवार आधारित) लिया जाएगा, जबकि दूसरे फेज में ‘व्यक्तिगत डेटा’ (Individual Data) के संकलन पर जोर रहेगा। इसी चरण में केंद्र सरकार की नीतियों के अनुरूप डेटा संग्रह की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

ऐतिहासिक फैसला: आजादी के बाद पहली बार जातिगत जनगणना

इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जातिगत जनगणना‘ (Caste Census) का शामिल होना है। आजादी के बाद भारत में पहली बार आधिकारिक तौर पर जाति आधारित आंकड़े जुटाए जाएंगे। यह प्रक्रिया दूसरे चरण यानी फरवरी 2027 में संपन्न होगी। हालांकि, शीतल वर्मा ने स्पष्ट किया कि जातिगत जनगणना के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अभी तय की जानी बाकी है, जिसे केंद्र की नीति के अनुसार तैयार किया जाएगा।

विशाल जनशक्ति का प्रबंध और प्रशासनिक ढांचा

यूपी जैसे विशाल राज्य में इस कार्य को पूरा करने के लिए 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की विशाल फौज तैनात की गई है। इस टीम में:

  • 18 मंडल आयुक्त और 75 जिलाधिकारी।
  • 17 नगर आयुक्त और 600 जिला स्तरीय अधिकारी।
  • 1195 चार्ज अधिकारी और 285 मास्टर ट्रेनर।
  • 6939 फील्ड ट्रेनर और लगभग 5 लाख पर्यवेक्षक व प्रगणक।

डिजिटल जनगणना और केंद्र की गाइडलाइंस

पूरी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए मोबाइल ऐप और डिजिटल उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है। शीतल वर्मा ने जोर देकर कहा कि दूसरे चरण की व्यक्तिगत और जातिगत गणना पूरी तरह से केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत होगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर कोने तक पहुंचकर सटीक डेटा प्राप्त किया जाए, जो भविष्य की सरकारी योजनाओं और नीति निर्धारण में मील का पत्थर साबित होगा।

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