UP Cabinet Expansion: योगी कैबिनेट विस्तार के बाद भी सस्पेंस बरकरार, विभागों का इंतजार जारी

यूपी में कैबिनेट विस्तार के 6 दिन बाद भी विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है जिससे सियासी हलचल बढ़ गई है क्या यह देरी रणनीतिक योजना का हिस्सा है या अंदरूनी खींचतान का नतीजा दिल्ली से लखनऊ तक बैठकों के बावजूद मामला क्यों अटका है जानें पूरी रिपोर्ट विस्तार से

योगी कैबिनेट विस्तार के बाद भी सस्पेंस बरकरार

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 16, 2026

UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश सरकार में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी विभागों का बंटवारा अभी तक नहीं हो पाया है। 10 मई को कैबिनेट का विस्तार किया गया था, लेकिन उसके 6 दिन यानी 144 घंटे बीत जाने के बावजूद नए मंत्रियों को उनके विभाग नहीं सौंपे गए हैं। इस देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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सियासी बयानबाज़ी हुई तेज

विभागों के आवंटन में हो रही देरी को लेकर विपक्षी दल समाजवादी पार्टी लगातार सरकार पर निशाना साध रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है। सपा नेताओं का कहना है कि सरकार अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है, जबकि बीजेपी इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है।

दिल्ली से लखनऊ तक बैठकों का दौर

स्थिति को सुलझाने के लिए दिल्ली से लेकर लखनऊ तक लगातार बैठकों का दौर जारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की। वहीं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से भी उनकी बैठक हुई, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि विभागों का मामला जल्द सुलझ जाएगा, लेकिन अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

आखिर कहां अटका है पेच?

सूत्रों के अनुसार, विभागों के बंटवारे में देरी के पीछे रणनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। बीजेपी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संतुलन साधने की कोशिश कर रही है। पार्टी चाहती है कि विभागों का आवंटन ऐसा हो जिससे जनता के बीच सही संदेश जाए और यह न लगे कि कैबिनेट विस्तार केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर किया गया है।

पश्चिमी यूपी पर खास फोकस

सूत्रों का यह भी कहना है कि बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। इसी रणनीति के तहत पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही सुरेंद्र दिलेर को भी जिम्मेदारी दिए जाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन को साधा जा सके और आगामी चुनावों में पार्टी को लाभ मिल सके।

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विपक्ष का हमला जारी

इस पूरे मामले पर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि मंत्रियों के विभागों को लेकर चल रही देरी सरकार की अंदरूनी असहमति को दर्शाती है। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से सोच-समझकर और रणनीति के तहत की जा रही है।