UP Cabinet Expansion: यूपी कैबिनेट विस्तार के बाद भी विभागों का बंटवारा अटका, सामने आई बड़ी वजह

UP कैबिनेट विस्तार के बाद भी नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आखिर किन वजहों से यह फैसला अटका हुआ है, क्या दिल्ली-लखनऊ के बीच कोई मतभेद है और कब होगा अंतिम फैसला, जानिए पूरी अंदरूनी कहानी।

यूपी कैबिनेट विस्तार के बाद भी विभागों का बंटवारा अटका

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 14, 2026

UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी नए मंत्रियों को अब तक विभाग आवंटित नहीं किए गए हैं। विस्तार को लगभग पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन विभागों के बंटवारे को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इस देरी को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चाएं तेज हैं। मंत्रिमंडल विस्तार में कुल आठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें दो कैबिनेट मंत्री, दो स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और चार सामान्य राज्य मंत्री शामिल हैं।

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किन नेताओं को मिली जिम्मेदारी

इस विस्तार में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश सिंह राजपूत को राज्य मंत्री के रूप में जगह दी गई है। हालांकि नियुक्तियां तो हो चुकी हैं, लेकिन इन सभी मंत्रियों के विभागों का वितरण अभी तक अटका हुआ है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर कामकाज की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

विभागों के बंटवारे पर क्यों अटका मामला

सूत्रों के अनुसार, सबसे ज्यादा चर्चा और मंथन नए शामिल किए गए कैबिनेट मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभागों को लेकर चल रही है। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर इस विषय पर लगातार विचार-विमर्श हो रहा है।

बताया जा रहा है कि मौजूदा विभागों में संभावित फेरबदल की भी संभावना है, जिसके चलते निर्णय और जटिल हो गया है। साथ ही राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश भी विभाग आवंटन को प्रभावित कर रही है।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी अहम कारण

विभागों के बंटवारे में जातीय संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिले, जिससे राजनीतिक संतुलन बना रहे। इसके अलावा आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को ध्यान में रखते हुए भी विभागों का आवंटन किया जा रहा है। इसी कारण हर निर्णय को बेहद सोच-समझकर लिया जा रहा है।

दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी चर्चाएं

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी मुलाकात ने भी इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि कुछ विभागों को लेकर केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच सहमति अभी पूरी तरह नहीं बन पाई है, जिससे बंटवारे में देरी हो रही है।

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जल्द फैसले की उम्मीद

हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद विभागों के बंटवारे पर अंतिम फैसला हो सकता है। इसके बाद सभी मंत्रियों को उनके जिम्मेदार विभाग सौंप दिए जाएंगे और सरकार का कामकाज और स्पष्ट रूप से आगे बढ़ेगा।

राजनीतिक हलकों में बढ़ी उत्सुकता

फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि किन नेताओं को कौन से महत्वपूर्ण विभाग मिलेंगे और किन मंत्रालयों में बदलाव देखने को मिलेगा। अब सभी की नजरें सरकार की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले दिनों में जारी हो सकती है।

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