Cabinet Meeting: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और अन्नदाताओं की समृद्धि से जुड़े कई क्रांतिकारी फैसले लिए गए। इस बैठक का सबसे मुख्य आकर्षण किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई वृद्धि रही। सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और खेती-किसानी को लाभ का सौदा बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कैबिनेट के इन निर्णयों से न केवल कृषि क्षेत्र को नई संजीवनी मिलेगी, बल्कि राज्य के लाखों किसानों की आर्थिक स्थिति में भी व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP Rate) में वृद्धि
कैबिनेट बैठक का सबसे ऐतिहासिक निर्णय गेहूं की खरीद दर से जुड़ा रहा। योगी सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 160 रुपये प्रति क्विंटल की शानदार बढ़ोतरी को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समर्थन मूल्य में इस इजाफे से किसानों को उनकी कड़ी मेहनत का वाजिब और लाभकारी मूल्य (Remunerative Price) मिल सकेगा। सरकार के इस कदम का प्राथमिक उद्देश्य खेती की लागत को कम करना और किसानों की शुद्ध आय (Net Income) में उल्लेखनीय वृद्धि करना है, जिससे उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में खुशहाली आए।
35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर की जानकारी
मंत्रिमंडल की इस अहम बैठक के समापन के पश्चात वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मीडिया को संयुक्त रूप से निर्णयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक के एजेंडे में कुल 37 विधायी प्रस्ताव शामिल किए गए थे। गहन विचार-विमर्श के बाद, मंत्रिपरिषद ने 35 विकासकारी योजनाओं और प्रस्तावों को हरी झंडी दिखा दी है, जबकि तकनीकी कारणों से दो प्रस्तावों को फिलहाल स्थगित रखा गया है। स्वीकृत प्रस्तावों में आधारभूत संरचना (Infrastructure), शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों से संबंधित नीतिगत बदलाव शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के लाखों किसान परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ
राज्य सरकार का दृढ़ विश्वास है कि गेहूं के दामों में की गई इस वृद्धि से उत्तर प्रदेश के लाखों मध्यम और लघु किसानों को सीधा वित्तीय लाभ (Direct Financial Benefit) पहुंचेगा। विशेषकर रबी सीजन की फसल कटाई से पहले लिया गया यह निर्णय किसानों के लिए एक बड़े बोनस की तरह है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने स्पष्ट किया कि सरकार पारदर्शी तरीके से गेहूं की खरीद सुनिश्चित करेगी ताकि बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो और लाभ सीधे वास्तविक काश्तकारों के बैंक खातों तक पहुंचे। इससे प्रदेश में खाद्य सुरक्षा (Food Security) के साथ-साथ कृषि उत्पादन के प्रति प्रतिस्पर्धात्मक उत्साह भी बढ़ेगा।
अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश
केवल नीति निर्धारण तक सीमित न रहते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी स्वीकृत 35 प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना (Timeline) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़ाई से निर्देशित किया गया है कि विकास परियोजनाओं और किसान कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक इन सभी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जाए, जिससे ‘अंत्योदय’ का संकल्प सिद्ध हो सके।









