Gyanesh Kumar Controversy: ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर राहुल गांधी का सवाल, मोदी ने चुना या चयन समिति ने?

CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्ष का हमला तेज है। राहुल गांधी ने नियुक्ति प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए ‘वोट चोरी’ के आरोप दोहराए हैं। हालांकि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रधानमंत्री ने अकेले नहीं की थी, बल्कि चयन समिति में राहुल गांधी भी शामिल थे।

CEC की नियुक्ति पर राहुल का सवाल

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 24, 2026

Gyanesh Kumar Controversy : दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और मतदाता के वोट की सुरक्षा चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थागत जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।

पहले एंटी-इंकम्बेंसी से बदलती रहती थीं सरकारें

राहुल गांधी ने कहा कि पहले देश की राजनीति में एंटी-इंकम्बेंसी का असर दिखाई देता था और अलग-अलग चुनावों में सरकारें बदलती रहती थीं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के दौर में भी चुनावी परिस्थितियां बदली थीं। राहुल गांधी ने हरियाणा और महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में भी अलग-अलग समय पर सरकारें बदलती रही हैं, लेकिन अब उन्हें लगातार चुनावी बदलाव दिखाई नहीं देता।

बीजेपी की लगातार जीत पर राहुल ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक दौर में बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है। उन्होंने इस स्थिति को चुनावी व्यवस्था और मतदाता के विश्वास से जोड़ते हुए सवाल उठाए। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए जरूरी है। उनके ये बयान राजनीतिक आरोपों के तौर पर सामने आए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी निर्णय प्रक्रिया को संस्थागत और सामूहिक बताया है।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का किया जिक्र

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के भीतर सामने आई कथित असहमति का भी उल्लेख किया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के कई फैसलों पर रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

चुनाव आयोग ने कहा, अंतिम फैसले सर्वसम्मत

इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के मुताबिक, पिछले एक वर्ष में लिए गए अंतिम निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं। आयोग ने यह भी कहा कि केवल आंतरिक टिप्पणियों को अलग करके देखने से पूरी निर्णय प्रक्रिया की तस्वीर सामने नहीं आती।

ज्ञानेश कुमार के चयन को लेकर राहुल का दावा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी उल्लेख किया। उन्होंने उनके चयन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़ते हुए सवाल उठाए और आयोग की निर्णय प्रक्रिया में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर राजनीतिक आरोप लगाए। इस पूरे मामले में राहुल गांधी के दावों और चुनाव आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि आयोग ने अपनी अंतिम निर्णय प्रक्रिया को सर्वसम्मत बताया है।

वोट को लोकतंत्र की बुनियाद बताया

राहुल गांधी ने कहा कि वोट भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता के वोट की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि अगर वोट के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ होती है, तो इसका असर केवल चुनाव परिणाम तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

वोट की विश्वसनीयता और कानून बनाने की प्रक्रिया

राहुल गांधी ने आगे कहा कि अगर किसी व्यक्ति के संसद पहुंचने को लेकर वोट की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, तो उसके द्वारा बनाए गए कानूनों की वैधता को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। उन्होंने इस मुद्दे को नागरिकों के अधिकार और अभिव्यक्ति से जोड़ते हुए कहा कि मतदाता का भरोसा लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारभूत आवश्यकता है।

SIR विवाद के बीच राजनीतिक बहस तेज

राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक विवाद जारी है। रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख होने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग राय विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय पूरे आयोग ने मिलकर लिए हैं।

चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी मुख्य बहस

फिलहाल इस विवाद का केंद्र SIR, मतदाता सूची, चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और वोट की विश्वसनीयता है। विपक्ष इन मुद्दों को मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को सामूहिक संस्थागत प्रक्रिया का परिणाम बता रहा है। ऐसे में राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने चुनावी व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही को लेकर जारी सार्वजनिक बहस को फिर प्रमुखता दे दी है।

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