UP Vidhansabha Chunav 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं. 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में सत्ता की लड़ाई केवल राज्य की सरकार तय नहीं करती, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी प्रभावित करती है. ऐसे में बाराबंकी जिले की जैदपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट संख्या-269 राजनीतिक विश्लेषकों और दलों के लिए खास महत्व रखती है। समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस इस सीट पर अपनी रणनीति को मजबूत करने में जुटी हैं.
जैदपुर विधानसभा सीट का इतिहास
बताते चले कि, जैदपुर विधानसभा सीट पहले मसौली विधानसभा क्षेत्र के नाम से जानी जाती थी. साल 2011 के परिसीमन के बाद मसौली और सिद्धौर सुरक्षित सीटों के पुनर्गठन से जैदपुर (एससी) विधानसभा का गठन हुआ. इसमें जैदपुर, सिद्धौर और सतरिख नगर पंचायतों के साथ मसौली और हरख ब्लॉक के कई गांवों को शामिल किया गया. परिसीमन के बाद इस सीट का राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप भी बदला, जिससे चुनावी समीकरण नए तरीके से बनने लगे.
मोहसिना किदवई और बेनी प्रसाद वर्मा से जुड़ी रही जैदपुर की राजनीतिक विरासत
आपको बता दे कि, जैदपुर और पूर्व की मसौली विधानसभा सीट लंबे समय तक प्रदेश की वीआईपी सीट मानी जाती रही. इस क्षेत्र का संबंध पूर्व केंद्रीय मंत्री रफी अहमद किदवई, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई, पूर्व राज्यपाल एखलाकुर रहमान किदवई, राजनयिक मुस्तफा कामिल किदवई और समाजवादी नेता बेनी प्रसाद वर्मा जैसे दिग्गज नेताओं से रहा है. इन्हीं राजनीतिक हस्तियों के कारण यह सीट वर्षों तक प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित विधानसभा सीटों में गिनी जाती रही.
2012 से 2022 तक का पूरा रिकॉर्ड
परिसीमन के बाद पहली बार साल 2012 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर मतदान हुआ. समाजवादी पार्टी के राम गोपाल रावत ने बसपा उम्मीदवार वेद प्रकाश रावत को 23,041 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। कांग्रेस तीसरे और भाजपा चौथे स्थान पर रही. साल 2017 विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर के बीच पहली बार इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की. भाजपा उम्मीदवार उपेंद्र सिंह रावत ने कांग्रेस के तनुज पुनिया को लगभग 28 हजार वोटों से हराया। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी चौथे स्थान पर खिसक गई थी.
इसके बाद 2019 लोकसभा चुनाव में उपेंद्र सिंह रावत सांसद चुने गए, जिससे सीट खाली हो गई. अक्टूबर 2019 में हुए उपचुनाव में समाजवादी पार्टी के गौरव कुमार रावत ने भाजपा उम्मीदवार अम्बरीश रावत को 4,165 वोटों से हराकर सीट पर फिर कब्जा कर लिया.
2022 विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी ने अपनी बढ़त बरकरार रखी. सपा के गौरव कुमार ने भाजपा के अम्बरीश रावत को 2,982 वोटों से हराया. बसपा की ऊषा सिंह और कांग्रेस के तनुज पुनिया भी मैदान में थे, लेकिन मुकाबला मुख्य रूप से सपा और भाजपा के बीच रहा.
जैदपुर विधानसभा का सामाजिक समीकरण

जैदपुर विधानसभा सीट का चुनावी गणित पूरी तरह सामाजिक समीकरणों पर आधारित माना जाता है. यहां मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं. इसके अलावा कुर्मी, यादव और दलित समुदाय भी चुनाव परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. जैदपुर कस्बा मुस्लिम बहुल क्षेत्र माना जाता है, जबकि हरख ब्लॉक और आसपास के इलाकों में कुर्मी समाज की मजबूत मौजूदगी है. ननकूपुरवा, मोहनापुर और कटेशर जैसे गांवों में यादव मतदाता बड़ी संख्या में हैं. यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति में इन सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देते हैं.
भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला

पिछले कुछ चुनावों में जैदपुर सीट पर मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच देखने को मिला है. हालांकि बसपा और कांग्रेस भी अपने पारंपरिक वोट बैंक के सहारे चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश करती रही हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि विपक्षी वोटों का बंटवारा होता है तो भाजपा को लाभ मिल सकता है, जबकि सामाजिक समीकरण एकजुट रहे तो सपा अपनी बढ़त बनाए रख सकती है.
कृषि, बुनकरी और मेंथा की खेती से पहचान रखती है जैदपुर विधानसभा

जैदपुर विधानसभा केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक और कृषि क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह इलाका मेंथा (Peppermint) की खेती के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां बड़े पैमाने पर केला, टमाटर, आलू, मशरूम, शिमला मिर्च और आम की खेती की जाती है. प्रदेश के प्रसिद्ध प्रगतिशील किसान और पद्मश्री सम्मानित रामसरन वर्मा भी इसी क्षेत्र से आते हैं। इसके अलावा यहां बड़ी संख्या में बुनकर समुदाय निवास करता है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देता है.
जैदपुर सीट पर क्या होंगे प्रमुख चुनावी मुद्दे?
विधानसभा चुनाव 2027 में जैदपुर सीट पर स्थानीय और राज्य स्तरीय कई मुद्दे प्रभाव डाल सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- किसानों की आय और कृषि नीतियां
- मेंथा और बागवानी उत्पादों का बेहतर बाजार
- बुनकरों के लिए रोजगार और योजनाएं
- सड़क, बिजली और सिंचाई सुविधाएं
- कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा
- युवाओं के लिए रोजगार
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
- सामाजिक और जातीय समीकरण
क्या जैदपुर में फिर बदलेगा चुनावी इतिहास?
जैदपुर विधानसभा सीट का इतिहास बताता है कि यहां मतदाता समय-समय पर राजनीतिक बदलाव भी करते रहे हैं और मजबूत स्थानीय नेतृत्व को भी समर्थन देते रहे हैं. समाजवादी पार्टी इस सीट को अपने कब्जे में बनाए रखना चाहेगी, जबकि भाजपा 2017 की सफलता दोहराने की कोशिश करेगी. बसपा और कांग्रेस भी अपने संगठन को मजबूत कर मुकाबले को बहुकोणीय बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
जैसे-जैसे यूपी विधानसभा चुनाव 2027 नजदीक आएगा, जैदपुर विधानसभा सीट पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी. सामाजिक समीकरण, उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय विकास और चुनावी गठबंधन तय करेंगे कि 2027 में जैदपुर की जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है.










