UNSC India : UNSC में भारत ने फिर लगाई पाकिस्तान को फटकार, कहा- आतंकवाद को नीति की तरह इस्तेमाल करता है

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य की नीति की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। भारत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के रुख को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

UNSC India

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 23, 2026

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UNSC India : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारत ने आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतानेनी हरीश ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को अपनी राज्य नीति के एक साधन के रूप में इस्तेमाल करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा इस तथ्य में किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है। भारत की ओर से यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने बैठक के दौरान कश्मीर से जुड़े मुद्दे उठाने की कोशिश की।

पाकिस्तान पर झूठा नैरेटिव फैलाने का आरोप

भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि सुरक्षा परिषद की बैठक का विषय प्राकृतिक संसाधनों के सुशासन और शांति, सुरक्षा तथा समृद्धि से जुड़ा था। भारत का उद्देश्य इस मंच पर अन्य मुद्दे उठाना नहीं था, लेकिन पाकिस्तान ने इस अवसर का उपयोग अपने कथित राजनीतिक एजेंडे और झूठे नैरेटिव को प्रस्तुत करने के लिए किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के बयानों के कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल को जवाब देना आवश्यक हो गया। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए करता है।

जम्मू-कश्मीर पर भारत का स्पष्ट रुख

पर्वतानेनी हरीश ने अपने संबोधन में दोहराया कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक बयान नहीं बल्कि भारत का संवैधानिक और कानूनी दृष्टिकोण है। उनके अनुसार, इस तथ्य को पाकिस्तान लगातार नजरअंदाज करता है, जबकि वास्तविकता इससे अलग नहीं है। भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर से जुड़ा उसका दृष्टिकोण पहले जैसा ही कायम है।

अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठाया

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित वास्तविक लंबित मुद्दा भारत की उस भूमि का है, जिस पर पाकिस्तान का अवैध कब्जा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत का कहना है कि इस विषय पर उसका रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसे लगातार दोहराया जाता रहा है।

सिंधु जल संधि पर दोहराया भारत का रुख

अपने संबोधन के दौरान पर्वतानेनी हरीश ने सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर भारत का दृष्टिकोण लगातार स्पष्ट और एक जैसा रहा है। उनके अनुसार, किसी भी द्विपक्षीय सहयोग की सफलता आपसी विश्वास और सद्भावना पर निर्भर करती है। यदि सीमापार आतंकवाद को लगातार राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो ऐसे माहौल में भरोसे पर आधारित सहयोग संभव नहीं हो सकता।

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर गंभीर आरोप

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान पर एक बार फिर सीमापार आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल किसी भी देश की नीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक आतंकवाद जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगती, तब तक क्षेत्रीय शांति और स्थिरता प्रभावित होती रहेगी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पाकिस्तान को दी अपने देश पर ध्यान देने की सलाह

अपने संबोधन के अंत में पर्वतानेनी हरीश ने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए कहा कि भारत पर निराधार आरोप लगाने के बजाय उसे अपने देश के भीतर मौजूद चुनौतियों और समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अपने नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए आंतरिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। भारत का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए जिम्मेदार और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना सभी देशों के हित में है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहराया अपना पक्ष

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस बैठक में भारत ने आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर अपना आधिकारिक रुख दोहराया। भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर पहले की तरह दृढ़ता से कायम रहेगा। साथ ही यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग रचनात्मक संवाद के लिए होना चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप या भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए।

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