United Nations: संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर सोमवार, 27 अप्रैल 2026 को वैश्विक राजनीति का एक तनावपूर्ण अध्याय देखने को मिला। अवसर था परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा के लिए आयोजित सम्मेलन का, जहाँ ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि एक-दूसरे के सामने आ गए। विवाद की मुख्य जड़ ईरान को इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के उपाध्यक्ष के रूप में चुना जाना था, जिस पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान की नियुक्ति को बताया ‘अपमान’
अमेरिकी हथियार नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक सचिव क्रिस्टोफर यॉ ने इस नियुक्ति पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ईरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि तेहरान ने अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का कभी सम्मान नहीं किया है। यॉ ने जोर देकर कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग करने में लगातार विफल रहा है। उनके अनुसार, ऐसे देश को परमाणु अप्रसार से जुड़े सम्मेलन में उपाध्यक्ष का पद देना पूरे विश्व समुदाय के लिए एक “अपमान” जैसा है। अमेरिका का मानना है कि ईरान की नीतियां परमाणु सुरक्षा के वैश्विक मानकों के विपरीत हैं।
ईरान का पलटवार: अमेरिका के दावों को बताया राजनीति से प्रेरित
ईरान ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। IAEA में ईरान के राजदूत रेजा नजफी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका के दावे निराधार और केवल राजनीतिक द्वेष से प्रेरित हैं। उन्होंने अमेरिका के इतिहास की ओर इशारा करते हुए पलटवार किया कि “परमाणु हथियारों का वास्तविक उपयोग करने वाला दुनिया का एकमात्र देश होने के नाते अमेरिका को किसी अन्य राष्ट्र पर फैसला सुनाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।” नजफी ने स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों में बाधा डालना अमेरिका की पुरानी आदत है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और आर्थिक प्रतिबंधों का पेंच
इस टकराव के बीच ईरान ने एक नया कूटनीतिक कार्ड खेला है। तेहरान ने प्रस्ताव दिया है कि यदि अमेरिका उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटा लेता है, तो वह ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने पर विचार कर सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है। हालांकि, ईरान की इस शर्तिया पेशकश पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का मानना है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को कूटनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा बनाना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की शांति और संवाद की अपील
बढ़ते तनाव को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने दोहराया कि वर्तमान हिंसक टकराव या परमाणु विवाद का कोई भी “सैन्य समाधान” संभव नहीं है। गुटेरेस ने जोर देकर कहा कि केवल बातचीत और शांति वार्ता (Peace Talk) के जरिए ही स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक शिष्टाचार बनाए रखने और परमाणु अप्रसार के लक्ष्यों को प्राथमिकता देने की अपील की।
ईरान-अमेरिका संबंधों का ऐतिहासिक गतिरोध
गौरतलब है कि वर्ष 1980 के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच कोई औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से दोनों देशों के बीच शत्रुता का भाव बना हुआ है। वे सीधे संवाद के बजाय अक्सर संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों का उपयोग एक-दूसरे पर निशाना साधने के लिए करते हैं। जहाँ अमेरिका को संदेह है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान का दावा है कि उसकी परमाणु गतिविधियाँ केवल ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा अनुसंधान तक सीमित हैं। सोमवार को हुई यह नोकझोंक इसी पुराने गतिरोध की नई कड़ी है।
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