UGC Bill 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए प्रस्तावित नियमों को लेकर सवर्ण समाज में विरोध की लहर उठ रही है। आगरा में भाजपा के पूर्व पार्षद जगदीश पचौरी और उनके साथियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को खून से पत्र लिखकर इस नियम को तत्काल वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही सैकड़ों लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर भी विरोध दर्ज कराया।
जगदीश पचौरी ने कहा कि यह बिल गंभीर त्रुटियों से भरा हुआ है और भविष्य में यह समाज के लिए अत्यंत कष्टप्रद साबित हो सकता है। उनके अनुसार, नियमों के कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिनसे इनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठते हैं। उन्होंने कहा कि यह नियम सवर्ण समाज के उत्पीड़न और हताशा का प्रतीक बन सकता है। इसलिए सरकार को इसे वापस लेने या संशोधित करने पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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क्षत्रिय महासभा की चेतावनी और विरोध का स्वर
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (ब्रज प्रदेश) ने भी इस नियम के खिलाफ विरोध जताया है। महासभा के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार नियम में बदलाव नहीं करती है, तो आंदोलन तेज हो सकता है। 27 जनवरी को ब्रज प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपने का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय ताजगंज स्थित होटल ग्रैंड अंपायर में आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।
सामाजिक एकता पर जोर
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के वरिष्ठ राष्ट्रीय महामंत्री रघुवंशी सिंह राजू ने कहा कि सामाजिक एकता कमजोर होने की वजह से ही कुछ ताकतें सवर्ण समाज के विरुद्ध ऐसे नियम बनाने का साहस कर रही हैं। उन्होंने अपील की कि सवर्ण समाज की सभी जातियां एक मंच पर आकर इस नियम का विरोध करें। केवल सामाजिक एकजुटता के माध्यम से ही सरकार को नियम वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सकता है। राजू ने सवर्ण समाज के जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस नियम के विरोध में आवाज उठाएं। उनका कहना था कि यदि उन्होंने समय रहते इसका विरोध नहीं किया तो समाज की आने वाली पीढ़ियां उन्हें माफ नहीं करेंगी।
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बरेली में इस्तीफे की घटना और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
गणतंत्र दिवस के अवसर पर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने UGC के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। इस कदम से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई। सूचना मिलते ही बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम उनके आवास पहुंचे और इस्तीफे पर पुनर्विचार करने की अपील की। हालांकि, शासन ने सिटी मजिस्ट्रेट को निलंबित कर दिया है और पूरे मामले की जांच उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। इस घटना ने UGC नियमों के खिलाफ विरोध की गंभीरता को और भी स्पष्ट कर दिया है।










