Twisha Sharma Case: भोपाल की जिला अदालत ने ‘ट्विशा डेथ केस’ में मंगलवार, 2 जून को एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब ये दोनों आरोपी 16 जून तक जेल में रहेंगे। इससे पहले, सीबीआई की पांच दिन की रिमांड अवधि समाप्त होने पर उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने दोनों की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय लिया।
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गिरिबाला सिंह और समर्थ की गिरफ्तारी का घटनाक्रम
इस मामले की मुख्य आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी 27 मई को हुई थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सीबीआई ने उन्हें उनके भोपाल स्थित कटारा हिल्स आवास पर सात घंटे से अधिक लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। वहीं, उनके बेटे समर्थ सिंह को पुलिस ने 22 मई को जबलपुर से पकड़ा था, जब वह ट्विशा शर्मा की मौत के बाद लगभग एक सप्ताह तक लापता रहा था। समर्थ को सबसे पहले 23 मई को भोपाल की निचली अदालत में पेश किया गया था, जहाँ से उसे पहले पुलिस रिमांड और बाद में सीबीआई की कस्टडी में भेजा गया था।
दहेज प्रताड़ना और संदिग्ध मौत का मामला
ट्विशा शर्मा की मौत का यह मामला 12 मई का है, जब वह भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। ट्विशा के मायके वालों ने शुरुआत से ही उनके पति समर्थ और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। परिवार का दावा है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज प्रताड़ना का नतीजा है। परिवार द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और मामले की गंभीरता को देखते हुए, मध्य प्रदेश सरकार ने इस जांच को सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
सीबीआई की जांच
सीबीआई ने रिमांड अवधि के दौरान मामले की परतें खोलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। जांच एजेंसी समर्थ सिंह को उस कटारा हिल्स स्थित घर ले गई, जहाँ ट्विशा ने अपनी जान गंवाई थी। वहां सीबीआई टीम ने घंटों बिताए और विस्तृत फॉरेंसिक जांच की। इस दौरान घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के जरिए सबूत जुटाए गए। सीबीआई ने समर्थ से 12 मई की रात की हर छोटी-बड़ी घटना के बारे में गहन पूछताछ की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था। अब देखना यह है कि न्यायिक हिरासत के दौरान सीबीआई इस मामले में क्या और बड़े खुलासे करती है।
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