भगवान देवनारायण का जीवन मानव सेवा और लोककल्याण का संदेश देता है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भगवान देवनारायण का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत, उन्होंने मानव सेवा को ही माना अपना धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री उज्जैन के जमालपुरा में चल रहे देवनारायण कथा महोत्सव में वीसी से हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान देवनारायण सिर्फ़ गुर्जर समाज के आराध्य देव ही नहीं, बल्कि न्याय, लोक कल्याण, सेवा और पराक्रम के प्रतीक हैं। उनका पूरा जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध किया कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा और कमजोरों की रक्षा में निहित है‌। मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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Published On :

जून 3, 2026

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भगवान देवनारायण का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत, उन्होंने मानव सेवा को ही माना अपना धर्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री उज्जैन के जमालपुरा में चल रहे देवनारायण कथा महोत्सव में वीसी से हुए शामिल

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भगवान देवनारायण सिर्फ़ गुर्जर समाज के आराध्य देव ही नहीं, बल्कि न्याय, लोक कल्याण, सेवा और पराक्रम के प्रतीक हैं। उनका पूरा जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने अपने कर्मों से यह सिद्ध किया कि धर्म का वास्तविक स्वरूप मानवता की सेवा और कमजोरों की रक्षा में निहित है‌। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से उज्जैन जिले के ग्राम जमालपुरा में आयोजित देवनारायण कथा महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कथा महोत्सव आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान देवनारायण मंदिर परिसर में लगातार छठें वर्ष 7 दिवसीय कथा का आयोजन धर्म प्रेमियों के लिए सोने गर सुहागा की तरह है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान देवनारायण लोक देवता हैं। वे भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। उनका ननिहाल उज्जैन है़ वे 12 वर्ष तक उज्जैन में ही रहे। उनका जीवन सदैव जनसेवा और लोक कल्याण को समर्पित रहा। सेवा ही भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा धर्म हैं। हम सबको इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

प्रसिद्ध कथा वाचक पं. ईश्वर सिंह गुर्जर (भगत जी), रामचन्द्र जी, निर्भय सिंह आंजना, वीरेन्द्र आंजना, मानसिंह चौधरी, हीरालाल आंजना सहित बड़ी संख्या में स्थानीय धर्म प्रेमी उपस्थित थे।

 

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