Tejas Thackeray: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री Uddhav Thackeray के छोटे बेटे तेजस ठाकरे की तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें मुंबई के Reliance Hospital में भर्ती कराया गया। मेडिकल सूत्रों के अनुसार शुरुआती जांच के बाद उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिले हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है। जानकारी के मुताबिक, तेजस पिछले तीन दिनों से एक बीमारी का इलाज करा रहे थे। हालांकि बीमारी की प्रकृति को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बुधवार को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। परिवार के करीबी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल चिंता की कोई बड़ी बात नहीं है।
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माता-पिता अस्पताल में मौजूद
आपको बता दें कि, तेजस के अस्पताल में भर्ती होने की खबर मिलते ही उनके पिता उद्धव ठाकरे सुबह-सुबह अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से मुलाकात कर स्वास्थ्य की जानकारी ली। उनकी मां रश्मी ठाकरे भी अस्पताल में मौजूद हैं और बेटे के साथ समय बिता रही हैं। परिवार के सदस्य लगातार चिकित्सकों के संपर्क में हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सभी जरूरी मेडिकल टेस्ट किए जा चुके हैं और रिपोर्ट संतोषजनक है। डॉक्टरों का कहना है कि जल्द ही उन्हें छुट्टी भी मिल सकती है, यदि स्वास्थ्य में इसी तरह सुधार जारी रहा।
कौन हैं तेजस ठाकरे?
तेजस ठाकरे को राजनीति से जुड़े परिवार का हिस्सा होने के बावजूद अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक जीवन पसंद है। वे शिवसेना के कुछ कार्यक्रमों और चुनाव प्रचार में जरूर नजर आए हैं, लेकिन उन्होंने औपचारिक रूप से सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखा है। तेजस की पहचान एक वन्यजीव शोधकर्ता और फोटोग्राफर के रूप में अधिक है। प्रकृति और जैव विविधता के क्षेत्र में उनकी गहरी रुचि रही है। उन्होंने कम उम्र में ही सरीसृपों और उभयचरों पर अध्ययन शुरू कर दिया था। वर्ष 2012 में वे अंबोली क्षेत्र की अपनी पहली सरीसृप यात्रा पर गए थे, जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रजातियों का अध्ययन किया।
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वन्यजीव अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान

तेजस ठाकरे का नाम उस समय चर्चा में आया जब तमिलनाडु में एक भारतीय शोध दल द्वारा खोजी गई छिपकली की नई प्रजाति का नाम उनके सम्मान में रखा गया। यह प्रजाति गर्म इलाकों में पाई जाती है और रात में सक्रिय रहती है। इससे पहले भी वे कई नई प्रजातियों की खोज और दस्तावेजीकरण से जुड़े रहे हैं। बताया जाता है कि अब तक वे लगभग 60 प्रजातियों के अध्ययन और खोज में योगदान दे चुके हैं। 2017 में अंबोली में उन्होंने एक विशेष मछली प्रजाति देखी थी, जिसके दस्तावेजीकरण के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां ली गईं। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान 2021 में इस प्रक्रिया की औपचारिक घोषणा की गई।
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‘रैलियों से ज्यादा जंगल पसंद’
तेजस ठाकरे ने एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने कई राजनीतिक रैलियों और दशहरा सभाओं में भाग लिया है, लेकिन उन्हें भीड़भाड़ से ज्यादा जंगल और प्रकृति के बीच रहना पसंद है। उन्होंने स्वीकार किया था कि लोगों का ध्यान अक्सर उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि पर जाता है, जबकि उनकी असली रुचि वन्यजीव संरक्षण और शोध में है। फिलहाल परिवार और समर्थकों की दुआएं उनके साथ हैं। डॉक्टरों के मुताबिक उनकी स्थिति नियंत्रण में है और जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद है।









