Tata Sons : टाटा ग्रुप से टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की प्रस्तावित विदाई फिलहाल टलती नजर आ रही है। टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को एन चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर पांच साल का नया कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ टाटा ग्रुप के शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को फिलहाल नया मोड़ मिला है। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना था।
टाटा संस की लिस्टिंग को भी बोर्ड की मंजूरी
एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने के साथ टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी की संभावित लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने को भी मंजूरी दी है। टाटा संस टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। ऐसे में कंपनी की लिस्टिंग की तैयारी समूह के लिए महत्वपूर्ण कॉरपोरेट घटनाक्रम मानी जा रही है। इसका मतलब यह भी है कि अगर IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो चंद्रशेखरन उसकी तैयारी और क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फरवरी 2027 में खत्म होना था मौजूदा कार्यकाल
एन चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को खुद घोषणा की थी कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद टाटा संस के चेयरमैन के रूप में तीसरा कार्यकाल नहीं लेंगे। उनके इस बयान के बाद टाटा ग्रुप में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब बोर्ड की ओर से पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दिए जाने से घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।
टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
हालांकि चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल को लेकर अंतिम स्थिति टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका से भी जुड़ी हुई है। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला प्रमुख शेयरहोल्डर है। ऐसे में कंपनी के चेयरमैन और शीर्ष प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में उसकी राय का विशेष महत्व है। रिपोर्टों के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के निदेशक नोएल टाटा नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में रहे हैं।
नोएल टाटा ने पहले जताया था विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी में हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक के दौरान नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रस्तावित तीसरे कार्यकाल का विरोध किया था। रिपोर्ट में मामले से परिचित लोगों के हवाले से कहा गया कि नोएल टाटा अभी भी नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में हैं। हालांकि बोर्ड की ओर से पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी मिलने के बाद अब इस मुद्दे पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट का रुख
टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख ट्रस्टों में शामिल सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने चंद्रशेखरन के उस फैसले का सम्मान करने की बात कही थी, जिसमें उन्होंने तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को पेश नहीं करने की घोषणा की थी। इससे नेतृत्व को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और बोर्ड के बीच अलग-अलग विचारों की चर्चा सामने आई थी।
बहुमत हिस्सेदारी के कारण ट्रस्ट्स का प्रभाव
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार टाटा संस में चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर और शीर्ष प्रबंधन से जुड़े फैसलों में बहुमत शेयरहोल्डर की पसंद महत्वपूर्ण होगी। टाटा ट्रस्ट्स के पास लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण उसकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है। अब बोर्ड द्वारा चंद्रशेखरन को नया कार्यकाल मंजूर किए जाने के बाद ट्रस्ट्स का रुख और कंपनी की लिस्टिंग प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।
IPO की तैयारी में चंद्रशेखरन की भूमिका
टाटा संस की लिस्टिंग को मंजूरी मिलने से कंपनी के संभावित IPO की तैयारी भी चर्चा में आ गई है। यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो नियामकीय मंजूरियों, कॉरपोरेट संरचना, वैल्यूएशन और बाजार संबंधी तैयारियों जैसे कई चरण सामने आएंगे। ऐसे में पांच साल के नए कार्यकाल की मंजूरी एन चंद्रशेखरन को इस पूरी प्रक्रिया में निरंतर नेतृत्व की भूमिका दे सकती है।
अब टाटा ग्रुप में आगे क्या होगा
फिलहाल टाटा संस के बोर्ड का फैसला एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व को जारी रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दूसरी ओर टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी और नोएल टाटा के पहले के रुख को देखते हुए नेतृत्व से जुड़े घटनाक्रम पर आगे भी नजर बनी रहेगी। साथ ही टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग और IPO की तैयारी आने वाले समय में टाटा ग्रुप के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट प्रक्रिया बन सकती है।
Read More : Prithvi Shaw News: पृथ्वी शॉ से अलग हुईं आकृति अग्रवाल, मंगेतर ने सोशल मीडिया पर बताई वजह










