Swami Avimukteshwaranand Contorversy: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आजीवन बैन की तैयारी, प्रशासन ने थमाया नोटिस

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद चरम पर है। मौनी अमावस्या पर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और शंकराचार्य पदवी के उपयोग को लेकर नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने उन्हें आजीवन प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी है, जबकि संत पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताया है।

Swami Avimukteshwaranand Contorversy

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 22, 2026

Swami Avimukteshwaranand Contorversy: प्रयागराज में आयोजित पावन माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान पर्व से शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े टकराव में तब्दील हो गया है। मेला प्राधिकरण ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए एक नया नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में न केवल उनकी संस्था का भूमि आवंटन रद्द करने की चेतावनी दी गई है, बल्कि उन्हें भविष्य के सभी माघ मेलों से आजीवन प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रशासन ने इस गंभीर विषय पर उनसे 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण की मांग की है।

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संगम क्षेत्र में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन

मेला प्रशासन के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत संवेदनशील थी और किसी भी वाहन के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध था। प्रशासन का आरोप है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘बग्घी’ के साथ संगम नोड तक जाने की कोशिश की, जिससे वहां मौजूद लाखों श्रद्धालुओं के बीच भगदड़ की स्थिति पैदा हो सकती थी। अधिकारियों का तर्क है कि इस कृत्य से मेला प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, जिसके कारण सार्वजनिक सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी।

शंकराचार्य पदवी का उपयोग

नोटिस का एक अन्य प्रमुख बिंदु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा उपयोग की जा रही ‘शंकराचार्य’ की पदवी है। प्राधिकरण ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मेले में लगे बोर्डों पर खुद को शंकराचार्य के रूप में प्रस्तुत किया है, जो सुप्रीम कोर्ट के कानूनी आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर प्रशासन ने सवाल उठाया है कि क्यों न उनकी संस्था को दी गई सभी सरकारी सुविधाओं और भूमि आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाए।

प्रशासनिक नोटिस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पक्ष का पलटवार

शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने इन सभी आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने शिविर के बाहर पिछले समय की तारीख (बैक डेट) में नोटिस चस्पा किया है। योगिराज का कहना है कि उनके शिविर में कोई ‘बग्घी’ थी ही नहीं, और जिस वाहन का जिक्र किया जा रहा है, वह बग्घी की परिभाषा में नहीं आता। उन्होंने CCTV फुटेज की जांच की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन जानबूझकर धार्मिक कार्यों में दखलअंदाजी कर रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला

इस विवाद की जड़ें उस समय और गहरी हो गईं जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध अत्यंत तीखी टिप्पणी की। उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘हिंदू कहलाने के अयोग्य’ बताते हुए उनकी तुलना मुगल शासकों से कर दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हिंदू मंदिरों को तोड़ने का समर्थन कर रही है। जानकारों का मानना है कि इसी वैचारिक टकराव के कारण मेला प्राधिकरण और संत समाज के बीच यह प्रशासनिक युद्ध अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है।

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