West Bengal Election : भवानीपुर में सुवेंदु का बड़ा प्रहार, ममता को ‘झूठों की रानी’ कह कर घेरा

भवानीपुर की धरती पर सुवेंदु का 'महा-युद्ध': क्या 'झूठों की रानी' वाले बयान से हिलेगा दीदी का गढ़? बंगाल की राजनीति के दो सबसे बड़े धुरंधर एक बार फिर आमने-सामने हैं। सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें 'झूठों की रानी' करार दिया है। क्या यह सिर्फ चुनावी बयानबाजी है या दीदी के गढ़ को ढहाने की नई रणनीति? जानिए इस सियासी धमाके की पूरी सच्चाई!

West Bengal Election

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 10, 2026

West Bengal Election : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। जैसे-जैसे मतदान की तारीखें करीब आ रही हैं, नेताओं के बीच तीखे हमलों और पलटवार का दौर भी तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में, भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अब तक का सबसे कड़ा हमला बोला है। सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ बेहद आक्रामक लहजे का इस्तेमाल करते हुए उन्हें भ्रष्टाचार और झूठ की राजनीति का केंद्र बताया है। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है और दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया है।

सुवेंदु का सीधा प्रहार: ‘ममता बनर्जी हैं झूठों की रानी और चोर मचाए शोर’

मीडिया से मुखातिब होते हुए सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ममता बनर्जी “झूठों की रानी” हैं और उनका पूरा राजनीतिक करियर झूठ की बुनियाद पर टिका है। सुवेंदु ने आगे तंज कसते हुए कहा, “यह वही स्थिति है जहाँ चोर खुद शोर मचा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया है और जब जनता जवाब मांग रही है, तो मुख्यमंत्री केवल शोर मचाकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं। सुवेंदु के इस बयान को भवानीपुर के मतदाताओं को प्रभावित करने की एक बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

हुमायूं कबीर के वीडियो पर टिप्पणी: ‘ममता और हुमायूं हैं एक ही सिक्के के दो पहलू’

हाल ही में वायरल हुए टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के विवादित वीडियो पर भी सुवेंदु अधिकारी ने अपनी राय स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह कोई आपसी लड़ाई नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। सुवेंदु ने ममता बनर्जी और हुमायूं कबीर की तुलना फुटबॉल की दो टीमों से करते हुए कहा कि “ममता बनर्जी ए-टीम हैं और हुमायूं बी-टीम।” उन्होंने आगे कहा कि हम बाबरी मानसिकता के खिलाफ हैं और जो भी बाबर के नाम पर राजनीति करेगा, हम उसके विरुद्ध मजबूती से खड़े रहेंगे। सुवेंदु ने स्पष्ट किया कि टीएमसी के भीतर दिख रहे मतभेद केवल जनता को गुमराह करने के लिए हैं, जबकि अंदरखाने सब एक ही एजेंडे पर काम कर रहे हैं।

भवानीपुर सीट पर महामुकाबला: क्या नंदीग्राम का इतिहास दोहरा पाएंगे सुवेंदु?

इस विधानसभा चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि सुवेंदु अधिकारी एक बार फिर ममता बनर्जी को सीधी चुनौती दे रहे हैं। ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही हैं, और भाजपा ने उनके खिलाफ सुवेंदु अधिकारी को ही चुनावी मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में सुवेंदु ने नंदीग्राम सीट पर एक बेहद रोमांचक मुकाबले में ममता बनर्जी को शिकस्त दी थी। इस बार भी सुवेंदु दो सीटों—नंदीग्राम और भवानीपुर—से चुनाव लड़ रहे हैं। भवानीपुर की जंग अब केवल एक विधानसभा सीट की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है।

दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर: कभी ममता के ‘दाहिने हाथ’ थे सुवेंदु

सुवेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच की यह कड़वाहट और भी दिलचस्प हो जाती है जब हम उनके पुराने रिश्तों को देखते हैं। भाजपा में शामिल होने से पहले सुवेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस के सबसे कद्दावर और जमीन से जुड़े नेता माने जाते थे। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया था और उन्हें ममता का सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था। हालांकि, समय के साथ दोनों के बीच दूरियां बढ़ती गईं और अंततः सुवेंदु ने भाजपा का दामन थाम लिया। अब वे अपनी पूर्व ‘दीदी’ को सत्ता से बेदखल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

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