West Bengal Assembly Election 2026: बंगाल में सियासी उबाल! सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस ऑफिसर को दी खुली चेतावनी

पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि महिषादल और तामलुक के पुलिस अधिकारी भाजपा नेताओं को फोन कर TMC में शामिल होने या निर्दलीय लड़ने का दबाव बना रहे हैं। अधिकारी ने वीडियो सबूत होने की बात कहते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की चेतावनी दी है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

मार्च 20, 2026

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार के पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि वे भाजपा नेताओं को जबरन तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहे हैं। सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह सिलसिला नहीं रुका, तो वे इसकी शिकायत सीधे भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से करेंगे।

प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग का बड़ा दावा

बताते चले कि, सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके गृह जिले पूर्वी मिदनापुर में महिषादल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (IC) ने भाजपा के एक प्रमुख नेता, बिस्वनाथ बनर्जी को व्हाट्सएप कॉल किया। आरोप है कि पुलिस अधिकारी ने बनर्जी पर भाजपा छोड़कर सत्ताधारी दल टीएमसी में शामिल होने का दबाव बनाया। अधिकारी के अनुसार, यह न केवल राजनीतिक शुचिता का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी का नग्न दुरुपयोग है।

टिकट वितरण के दौरान बढ़ी हलचल

विपक्ष के नेता ने घटनाक्रम को स्पष्ट करते हुए कहा कि बिस्वनाथ बनर्जी एक जाने-माने नेता हैं और उम्मीद थी कि उन्हें भाजपा की हालिया सूची में उम्मीदवार बनाया जाएगा। हालांकि, टिकट न मिलने के तुरंत बाद पुलिस सक्रिय हो गई। सुवेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया कि जब राज्य में आदर्श चुनाव आचार संहिता (MCC) लागू है, तब कोई पुलिस अधिकारी किसी राजनीतिक दल के ‘एजेंट’ के रूप में कैसे काम कर सकता है? उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा हमला करार दिया है।

महिषादल थाना पहुंचे सुवेंदु

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुवेंदु अधिकारी स्वयं महिषादल पुलिस स्टेशन पहुंचे। हालांकि, मुख्य आरोपी पुलिस अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे, जिसके बाद उन्होंने ड्यूटी इंचार्ज से बात की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि पुलिस अधिकारी भाजपा कार्यकर्ताओं को डराना-धमकाना बंद करें। अधिकारी ने मीडिया से कहा, “आज मैंने केवल विनम्रतापूर्वक चेतावनी दी है। हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन अगर पुलिस ने अपनी सीमाएं लांघी, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”

वीडियो सबूतों का हवाला

सुवेंदु अधिकारी ने केवल एक घटना का जिक्र नहीं किया, बल्कि तामलुक के उपमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO) पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि उक्त अधिकारी ने भाजपा नेताओं को अपने दफ्तर बुलाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का दबाव बनाया था। सुवेंदु ने हुंकार भरते हुए कहा, “हमारे पास इन सभी घटनाओं के पुख्ता वीडियो सबूत मौजूद हैं। हम जानते हैं कि पर्दे के पीछे से कौन सी आउटसोर्स एजेंसियां और अधिकारी मिलकर खेल खेल रहे हैं।”

सरकारी कर्मियों को अंतिम चेतावनी

अंत में, विपक्ष के नेता ने पुलिस और नागरिक स्वयंसेवकों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सत्ताधारी दल के लिए काम करके अपना करियर दांव पर नहीं लगाना चाहिए। सुवेंदु ने याद दिलाया कि उन्हें जनता के टैक्स से वेतन मिलता है, न कि किसी विशेष राजनीतिक दल या उनकी चुनावी रणनीतिकार एजेंसी से। उन्होंने चेतावनी दी कि पक्षपात करने वाले अधिकारियों को भविष्य में गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।