Ganpati Visarjan 2026: दस दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के पावन पर्व पर अत्यंत धूमधाम, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली, अमृतसर और कानपुर समेत देश के कोने-कोने में श्रद्धालुओं ने ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्द आ’ के जयकारों के साथ अपने आराध्य भगवान गणेश को अंतिम विदाई दी। इस दौरान देश के विभिन्न घाटों, झीलों और नदियों के तटों पर आस्था, उमंग और श्रद्धा का एक अद्भुत और अलौकिक संगम देखने को मिला, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
Ganesh Visarjan 2026: चतुर्दशी खत्म होने के बाद 26 सितंबर तड़के विसर्जन का
विधि-विधान से आरती और पारंपरिक भोग के साथ विदाई

विसर्जन के इस पावन और भावुक अवसर से पहले श्रद्धालुओं ने अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की। भक्तों ने विधि-विधान के साथ बप्पा की आरती उतारी और उन्हें उनके प्रिय मोदक, विभिन्न प्रकार के फल और ताजे फूलों का भोग अर्पित किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की तथा अगले वर्ष फिर से पधारने का आग्रह करते हुए भावुक विदाई दी।
विदाई यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज, डीजे पर बज रहे भक्ति भजनों और पारंपरिक धुनों पर भक्त जमकर थिरकते और झूमते नजर आए। महिलाओं और युवाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला, जो एक-दूसरे को गुलाल लगाकर इस पर्व का जश्न मना रहे थे।
हैदराबाद और मुंबई में दिखा भव्य नजारा

देश के महानगरों में गणेश विसर्जन का स्वरूप और आकर्षण देखने लायक था:
हैदराबाद: यहाँ प्रसिद्ध खैराताबाद और ऐतिहासिक बालापुर गणेश उत्सव समिति (जिसने अपनी 47वीं शोभा यात्रा आयोजित की) के पंडालों में भारी जनसैलाब उमड़ा। भक्तों ने नाचते-गाते हुए भव्य शोभा यात्रा निकाली। इसके बाद हुसैन सागर झील में क्रेन की सहायता से विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन किया गया।
मुंबई: मायानगरी मुंबई में ‘लालबागचा राजा’ और ‘तेजुकाया के राजा’ समेत शहर के सभी प्रमुख गणपति पंडालों में भक्तों की भारी भीड़ जुटी। रंग-बिरंगे फूलों से सजी झांकियों और गुलाल के बाद बादलों की गड़गड़ाहट जैसे नारों के बीच बप्पा को अरब सागर और अन्य जलाशयों में विदा किया गया।
देश के अन्य राज्यों में भी गूंजे बप्पा के जयकारे

गणेशोत्सव का यह महापर्व केवल महाराष्ट्र और दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर भारत के राज्यों में भी पूरी भव्यता के साथ मनाया गया।
महाराष्ट्र के सतारा: यहाँ के कराड में प्रसिद्ध कृष्णा-कोयना संगम तट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर भगवान गणेश की प्रतिमाओं को पवित्र जल में विसर्जित किया।
पंजाब और उत्तर प्रदेश: पंजाब के अमृतसर तथा उत्तर प्रदेश के कानपुर जैसे प्रमुख शहरों में भी भक्तों ने ढोल-नगाड़ों की थाप और रंग-गुलाल के बीच भव्य शोभा यात्राएं निकालीं।
इन दस दिनों की पावन अवधि ने देश की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को और अधिक मजबूत किया। बप्पा के विसर्जन के साथ ही अब हर भक्त के मन में ‘अगले बरस तू जल्द आ’ की गूंज और अगले साल फिर मिलने की उम्मीद छा गई है।
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