Congress Protest: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की सियासत मेंवान उबाल आ गया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग को लेकर शुक्रवार को देश भर में व्यापक और उग्र विरोध प्रदर्शन किए। राजधानी दिल्ली से लेकर विभिन्न राज्यों की सड़कों पर भारी हंगामा देखने को मिला, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं।
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विभिन्न राज्यों में उग्र प्रदर्शन और नेताओं की हिरासत

विपक्ष के इस देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान देश के कई प्रमुख शहरों में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई:
गुवाहाटी (असम): असम में प्रदर्शन की कमान खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई संभाल रहे थे। स्थिति के तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने गौरव गोगोई समेत कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।
पटना और चंडीगढ़: बिहार की राजधानी पटना तथा पंजाब-हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन (पानी की बौछारें) का इस्तेमाल किया।
दिल्ली और अन्य राज्य: नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। यहाँ भारतीय युवा कांग्रेस और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए।
लखनऊ में बारिश के बीच कांग्रेस का आक्रामक तेवर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मूसलाधार बारिश के बावजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश कम नहीं हुआ और उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग पर निष्पक्ष चुनाव कराने में पूरी तरह नाकाम रहने का गंभीर आरोप लगाया।
राजेंद्र पाल गौतम ने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यह महज कोई प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने कहा कि संविधान ने चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव कराने की ताकत दी है, जो उसे देश के संविधान से प्राप्त हुई है, न कि किसी राजनीतिक दल से। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में बुरी तरह विफल रहा है।
राहुल गांधी के बवालों का हवाला और केंद्र सरकार पर निशाना

कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। उनका दावा है कि इस राजनीतिक संरक्षण के कारण ही चुनाव प्रक्रिया और चुनावी नतीजों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस दौरान कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा पूर्व में उठाए गए सवालों का हवाला दिया। पार्टी का कहना है कि राहुल गांधी ने पहले ही तथ्यों और ठोस सबूतों के साथ चुनाव आयोग की कार्यशैली और कमियों को जनता के सामने उजागर किया था।
क्या है इस पूरे विवाद की असल जड़?
यह पूरा राजनीतिक विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद भड़का है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कई बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों में मुख्य रूप से मतदाताओं के नाम जोड़ने व हटाने तथा डिजिटल डेटाबेस तक पहुंच जैसे संवेदनशील विषय शामिल थे। इस खुलासे के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर है।
चुनाव आयोग का पक्ष और सफाई
बढ़ते राजनीतिक दबाव और आंतरिक मतभेद के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए सभी दावों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि किसी भी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था के भीतर प्रशासनिक फीडबैक और अलग-अलग सुझाव आना एक बेहद सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी साफ किया कि एसआईआर से जुड़े तमाम अंतिम निर्णय पूरी तरह से सर्वसम्मति के आधार पर ही लिए गए थे।
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