Sonam Wangchuk: पर्यावरण कार्यकर्ता और प्रसिद्ध शिक्षाविद् सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के ऐतिहासिक प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाने वाले वांगचुक लंबी भूख हड़ताल के बाद अस्वस्थ हो गए थे, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद, घर लौटने से पहले वे सीधे राजघाट पहुंचे और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उनकी पत्नी गीतांजलि भी उनके साथ मौजूद थीं।
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महात्मा गांधी के मार्ग को बताया प्रासंगिक
राजघाट पर बापू को नमन करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपने स्वास्थ्य में सुधार की जानकारी दी। उन्होंने अहिंसा और सत्य के मार्ग की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि महात्मा गांधी के बताए रास्ते आज के समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। वांगचुक ने विश्वास जताया कि शांति और अहिंसा के बल पर ही बड़े से बड़े लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
वीडियो में उन्होंने अपने समर्थकों और देशवासियों का आभार जताते हुए कहा, “सभी को नमस्कार, आखिर वो दिन आया, जब मैं इस अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा हूं। काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं, खा रहा हूं और शरीर में जान आ रही है। आज मैं यहां से निकलते हुए और घर जाने से पहले राजघाट बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा। आप लोगों को याद होगा, ऐसे ही मैं जब आया था, अनशन शुरू करने से पहले राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित करके जंतर-मंतर पहुंचे थे।”
उन्होंने देशवासियों का धन्यवाद करते हुए आगे कहा, “मैं आप सभी को दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करता हूं। आप सभी ने आवाज में आवाज मिलाकर आंदोलन चलाया और कामयाब हुए। सभी को सलाम, जय हिंद।”
26 दिनों का लंबा अनशन और अस्पताल का सफर
सोनम वांगचुक पिछले महीने 28 जून को छात्रों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। वे अपनी मांगों और छात्रों के समर्थन में लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे रहे। लंबे समय तक अन्न-जल त्यागने के कारण उनकी सेहत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद 18 जुलाई को उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
सफदरजंग अस्पताल में रहने के दौरान वांगचुक ने यह बयान दिया था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो उन्हें हिरासत में रखा गया हो। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशानुसार उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चला।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में चला आंदोलन और शिक्षा मंत्रालय में बदलाव
गौरतलब है कि यह पूरा आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में लगातार 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर चला था। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक के मामलों के खिलाफ आवाज उठाना और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना था।
छात्रों के इस उग्र और अनुशासित आंदोलन के भारी दबाव के आगे अंततः सरकार को झुकना पड़ा। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद यह ऐतिहासिक आंदोलन सफलतापूर्वक समाप्त हुआ। शिक्षा मंत्रालय की कमान अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है। सोनम वांगचुक का अस्पताल से स्वस्थ होकर लौटना और इस आंदोलन की सफलता को देश के युवाओं के संघर्ष की जीत के रूप में देखा जा रहा है।










