NEET Paper Leak: नीट (NEET) पेपर लीक और परीक्षा में हुई व्यापक धांधलियों के खिलाफ देश के युवाओं और छात्रों का गुस्सा आखिरकार रंग लाया। कड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद सरकार को झुकना पड़ा और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए धर्मेंद्र प्रधान को अपने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। सरकार ने इस गंभीर मामले की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन भी कर दिया था, लेकिन सुनवाई के पहले ही दिन एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। तय तारीख यानी 27 जुलाई को सुनवाई के पहले ही दिन सीबीआई (CBI) के वकील कोर्ट में पेश नहीं हो सके, जिसके चलते अदालत ने मामले की सुनवाई को आगामी 3 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया है।
आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर होनी थी अहम सुनवाई
सोमवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस बहुचर्चित मामले के मुख्य आरोपियों—विकास और दिनेश बिवाल—की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी थी। लेकिन केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से अदालत कक्ष में कोई भी अधिकृत वकील या प्रतिनिधि मौजूद नहीं था।
वकील की गैर-मौजूदगी के कारण इन महत्वपूर्ण जमानत याचिकाओं पर किसी भी प्रकार की कानूनी बहस नहीं हो सकी। अदालत ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए यह माना कि अभियोजन पक्ष की अनुपस्थिति में मामले को आगे बढ़ाना न्याय संगत नहीं है। अब कानूनी गलियारों में इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई से पहले लोक अभियोजक (Public Prosecutor) की नियुक्ति और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी, ताकि सुनवाई बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।
जंतर-मंतर पर छात्रों का ऐतिहासिक प्रदर्शन और सरकार की कार्रवाई
गौरतलब है कि नीट परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के खिलाफ देश भर में महीनों तक उबाल देखा गया था। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने ऐतिहासिक और जोरदार प्रदर्शन किया था। छात्रों की मांग थी कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और जिम्मेदार मंत्रियों पर सख्त कार्रवाई हो। लंबे चले इस आंदोलन के दबाव के आगे अंततः सरकार को कदम उठाने पड़े।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों को भरोसा
इस राष्ट्रव्यापी विवाद और छात्रों के उग्र प्रदर्शन के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विद्यार्थियों को वीडियो संदेश के जरिए ढांढस बंधाया था। प्रधानमंत्री ने छात्रों को स्पष्ट रूप से भरोसा दिलाया था कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और फूल-प्रूफ बनाने के लिए बड़े पैमाने पर व्यापक कदम उठा रही है।
पीएम मोदी ने कड़े शब्दों में यह भी कहा था कि जिन असामाजिक तत्वों और गिरोहों ने देश के मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे तमाम मामलों की निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के लिए ही विशेष तौर पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का निर्णय लिया गया था। साथ ही, सरकार परीक्षा संबंधी गंभीर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भविष्य में और अधिक कड़े कानूनी प्रावधान लागू करने की दिशा में भी पूरी तत्परता से काम कर रही है। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।










