SIR Supreme Court Hearing: भारत के लोकतांत्रिक इतिहास और चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से आज यानी 27 मई का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट आज इस बात पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के पास मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) कराने का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है या नहीं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस संवेदनशील मामले पर अपना फैसला सुनाएगी। शीर्ष अदालत ने इस विषय से जुड़ी सभी याचिकाओं पर लंबी बहस सुनने के बाद पिछले 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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क्या है पूरा कानूनी विवाद?
इस मामले की कानूनी जड़ें मुख्य रूप से साल 2025 में हुए प्रशासनिक घटनाक्रमों से जुड़ी हैं। जून 2025 में जब चुनाव आयोग ने बिहार में बड़े स्तर पर एसआईआर (SIR) कराने का निर्णय लिया, तब विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसके खिलाफ अदालत का रुख किया। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम मौजूदा नियमों और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के विपरीत हो सकता है।
इस प्रक्रिया को चुनौती देने वालों में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के अलावा राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, राजद सांसद मनोज झा और राकांपा (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता और संगठन शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट को मुख्य रूप से यह तय करना है कि क्या संविधान का अनुच्छेद 326 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 चुनाव आयोग को वर्तमान स्वरूप में मतदाता सूचियों के इतने व्यापक और गहन पुनरीक्षण की शक्ति देता है या नहीं।
कई राज्यों में प्रक्रिया पूरी
ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग के इस अभियान पर किसी भी तरह की अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत की हरी झंडी के कारण देश के कई हिस्सों में यह काम सुचारू रूप से आगे बढ़ा:
जमीनी स्थिति: बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में एसआईआर (SIR) का काम पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। वहीं, उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में यह प्रक्रिया फिलहाल जारी है। इसके अलावा, असम ने ‘विशेष पुनरीक्षण’ का काम पूरा करके 10 फरवरी को ही अपने सभी 126 विधानसभा क्षेत्रों की अंतिम वोटर लिस्ट जारी कर दी थी।
सत्यापन के लिए [सरकारी विशिष्ट पहचान पत्र] के उपयोग का निर्देश
इस मामले की पिछली सुनवाइयों के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश दिया था। अदालत ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि वह मतदाताओं के [सरकारी विशिष्ट पहचान पत्र] को एसआईआर (SIR) के लिए 12वें अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल करे। हालांकि, इसके साथ ही अदालत ने दो बेहद जरूरी शर्तें भी जोड़ी थीं, यह पहचान पत्र केवल सत्यापन (Verification) के लिए मान्य होगा।
इसे किसी भी स्थिति में भारत की नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाएगा। चुनाव आयोग के पास इस पहचान पत्र का स्वतंत्र रूप से सत्यापन कराने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा।
चुनाव आयोग का देशव्यापी अभियान
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग फर्जी वोटरों को हटाने और मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक बनाने के लिए इस अभियान को लगातार आगे बढ़ा रहा है। 14 मई को की गई एक ताजा घोषणा के अनुसार, चुनाव आयोग ने देश के 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध तरीके से एसआईआर के तीसरे चरण (Phase-III) को शुरू कर दिया है।
इस तीसरे चरण के तहत मिजोरम, सिक्किम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा समेत पूर्वोत्तर के सात राज्यों ने भी अपनी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आज के फैसले से चुनाव आयोग के इस महा-अभियान को और मजबूती मिलती है या इसकी रफ्तार पर ब्रेक लगता है।
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