Rahul Gandhi News: भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर न केवल जनता, बल्कि उनकी अपनी पार्टी के नेता और गठबंधन सहयोगी भी सवाल उठा रहे हैं। पूनावाला के अनुसार, कांग्रेस के भीतर और बाहर राहुल गांधी के प्रति ‘अविश्वास’ का माहौल बन चुका है।
शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पंजाब के राजनीतिक घटनाक्रम का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्व नेता नवजोत कौर सिद्धू के हालिया बयानों ने पार्टी की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है। पूनावाला के मुताबिक, राहुल गांधी ने पंजाब की सद्भावना और हितों की लगातार अनदेखी की है। उन्होंने सिद्धू के उस पुराने बयान की भी याद दिलाई जिसमें कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिए भारी लेनदेन के आरोप लगे थे। भाजपा प्रवक्ता ने इसे राहुल गांधी के खिलाफ पंजाब से आया एक ‘अविश्वास प्रस्ताव’ करार दिया है।
‘इंडिया’ गठबंधन में दरार और क्षेत्रीय दलों की राहुल से दूरी
विपक्ष की एकता पर सवाल उठाते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी से न केवल जनता, बल्कि उनके इंडी अलायंस (INDIA Alliance) के साथी भी किनारा कर रहे हैं। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां से ‘राहुल हटाओ, ममता लाओ’ के नारे गूंज रहे हैं। पूनावाला का दावा है कि मणिशंकर अय्यर जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयान और असम कांग्रेस की मौजूदा स्थिति यह स्पष्ट करती है कि गठबंधन के सहयोगी और कांग्रेस के पुराने दिग्गज अब राहुल गांधी के नेतृत्व में भविष्य नहीं देख रहे हैं।
कांग्रेस आलाकमान के प्रति वरिष्ठ नेताओं की ‘घुटन’
बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने भी इस विवाद में कूदते हुए राहुल गांधी की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ सदस्य राहुल के नेतृत्व में “घुटन” महसूस कर रहे हैं। मनन कुमार मिश्रा के अनुसार, पार्टी के भीतर वरिष्ठों का सम्मान नहीं किया जा रहा है, जिससे वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश में हैं। असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के इस्तीफे और फिर उसे वापस लेने के हाई-वोल्टेज ड्रामे को इसी ‘दमघोंटू’ माहौल का परिणाम बताया जा रहा है।
सांगठनिक संकट और नेतृत्व की साख पर उठते सवाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के भीतर भी तनाव की स्थिति है। जितेंद्र सिंह और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं के हस्तक्षेप के बावजूद, जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश अध्यक्षों के बीच असंतोष कम नहीं हो रहा है। पूनावाला ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि राहुल गांधी आज अलग-थलग पड़ चुके हैं, क्योंकि न तो उनके पास जनता का समर्थन है और न ही अपने संगठन को एकजुट रखने की क्षमता।
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