Shankaracharya Avimukteshwaranand : शंकराचार्य का पीएम मोदी पर तंज, जनता से पहले सरकार बेचे अपना कीमती विमान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार की विनिवेश नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि देश में संसाधनों की कमी है, तो सबसे पहले प्रधानमंत्री और मंत्रियों के उपयोग में आने वाले अरबों के विमान बेचे जाने चाहिए। क्या धर्मगुरु का यह कड़ा रुख सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा करेगा? जानें पूरा विवाद।

Shankaracharya Avimukteshwaranand

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 12, 2026

Shankaracharya Avimukteshwaranand : देश की आर्थिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से खर्चों में कटौती की अपील की है। हालांकि, इस अपील पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोमवार को सोनभद्र में अपनी ‘गोविष्ट यात्रा’ के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सरकार को नसीहत दी कि त्याग और मितव्ययिता की शुरुआत सत्ता के शीर्ष से होनी चाहिए। शंकराचार्य का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री के विशेष विमान की लागत पर सवाल उठाए हैं।

“8,000 करोड़ का विमान बेचें, फिर जनता को दें सलाह”

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये पर चिंता जताते हुए कहा कि अमेरिकी डॉलर अब 100 रुपये के करीब पहुंच रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की ‘सोना न खरीदने’ और ‘ईंधन बचाने’ वाली अपील पर तंज कसते हुए कहा, “सरकार को लोगों से खर्च कम करने के लिए कहने से पहले अपने 8,000 करोड़ रुपये के विमान को बेच देना चाहिए। इसकी जगह कम ईंधन खपत वाले विमानों का उपयोग करना चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्म और नीति का पालन सबसे पहले अपने घर (सरकार) से शुरू होना चाहिए, तभी जनता पर इसका प्रभाव पड़ेगा।

पश्चिम एशिया संकट और पेट्रोलियम उत्पादों पर पीएम की चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे युद्ध और तनाव के प्रति आगाह किया था। उन्होंने कहा था कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित उपयोग समय की मांग है। पीएम ने नागरिकों से आग्रह किया कि आयातित ईंधन का उपयोग केवल अत्यंत आवश्यकता होने पर ही करें। उनके अनुसार, ऐसा करने से न केवल देश की विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि युद्ध के कारण होने वाले प्रतिकूल आर्थिक प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।

विदेशी शादियों और पर्यटन पर रोक लगाने की मांग

आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए पीएम मोदी ने ‘वेड इन इंडिया’ (Wed in India) के विचार पर जोर दिया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे गैर-जरूरी विदेश यात्राओं, विदेशों में छुट्टियां मनाने और ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के लिए विदेशों में पैसा बहाने से बचें। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि भारतीय नागरिक घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें और देश के भीतर ही शादियां करें, ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने मेट्रो, बस, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) जैसे सार्वजनिक परिवहन के साधनों को अपनाने की सलाह दी है।

सोना, खाद और स्थानीय उत्पादों पर प्रधानमंत्री का रोडमैप

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की विशेष अपील की है, क्योंकि सोने का आयात विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी बोझ डालता है। इसके अलावा, उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों और स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्तुओं (Vocal for Local) को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने रासायनिक खाद का उपयोग 50 प्रतिशत तक कम करने, प्राकृतिक खेती को अपनाने और डीजल पंपों के स्थान पर सौर पंप (Solar Pumps) लगाने का आह्वान किया। पीएम का मानना है कि इन छोटे बदलावों से देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा सकेगा।

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