Shami-Jahan: भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को अलीपुर कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राहत दी है। अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। यह मामला उनकी पूर्व पत्नी हसीन जहां द्वारा दर्ज कराया गया था। हसीन जहां ने आरोप लगाया था कि शमी द्वारा घर के खर्च के लिए दिया गया एक लाख रुपये का चेक बाउंस हो गया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए शमी को निर्दोष करार दिया।
गुजारा भत्ता का आदेश
शमी और हसीन जहां के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। पिछले साल जुलाई में कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने आदेश दिया था कि शमी अपनी पत्नी और बेटी के लिए ₹4 लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता देंगे। इसके बाद हसीन जहां ने इस राशि को बढ़ाकर ₹10 लाख करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अदालत का विस्तृत आदेश
न्यायमूर्ति अजय कुमार मुखर्जी ने आदेश में कहा था कि हसीन जहां को ₹1,50,000 प्रतिमाह और उनकी बेटी को ₹2,50,000 प्रतिमाह दिए जाएं। यह व्यवस्था मामले का निपटारा होने तक दोनों याचिकाकर्ताओं की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उचित होगी। साथ ही आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि शमी अपनी बेटी की शिक्षा और अन्य खर्चों में स्वेच्छा से अतिरिक्त सहायता कर सकते हैं।
विवाद का लंबा सिलसिला
शमी और हसीन जहां के बीच विवाद कई वर्षों से सुर्खियों में रहा है। हसीन जहां ने समय-समय पर शमी पर कई आरोप लगाए हैं, जिनमें घरेलू विवाद से लेकर आर्थिक मामलों तक शामिल हैं। हालांकि, कोर्ट के हालिया फैसले ने शमी को बड़ी राहत दी है और उनके खिलाफ दर्ज चेक बाउंस मामले को समाप्त कर दिया है।
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