Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर में भगवान शिव की भक्ति का माहौल बना हुआ है। ऐसे में मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब देखने को मिल रहा है और हर तरफ बम भोले के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा के अंबाला स्थित करीब 200 वर्ष पुराने प्राचीन कैलाश हाथीखाना मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सावन शिवरात्रि के मौके पर मंदिर में दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु सुबह तड़के पहुंचने लगे। जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 4 बजे से ही मंदिर परिसर में भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना की।
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हरिद्वार से कांवड़ लेकर पहुंचे शिवभक्त
सावन शिवरात्रि पर हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौटे कांवड़ियों ने भी मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। कांवड़ियों ने पवित्र गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक कर पूजा की। मंदिर परिसर में कांवड़ियों के पहुंचने से भक्तिमय माहौल और भी ज्यादा उत्साहपूर्ण हो गया। कांवड़ लेकर पहुंचे शिवभक्तों ने बताया कि यात्रा के दौरान उन्हें रास्ते में मौसम का भी अच्छा साथ मिला। उन्होंने प्रशासन की ओर से किए गए इंतजामों की भी सराहना की। कांवड़ियों का कहना था कि अंबाला पहुंचकर प्राचीन मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करना उनके लिए बेहद खास अनुभव है।
1844 में बना था मंदिर
अंबाला के कैलाश हाथीखाना मंदिर को शहर के प्रमुख और प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1844 में हुआ था, जिसके चलते इसका इतिहास करीब दो शताब्दियों पुराना माना जाता है। सामान्य दिनों में भी यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन के दौरान मंदिर में भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। खासतौर पर सावन शिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के महंत ने बताई सावन शिवरात्रि की महत्ता
मंदिर के महंत मोहन दास गिरी ने सावन शिवरात्रि के धार्मिक महत्व के बारे में श्रद्धालुओं को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है और इस दौरान शिवभक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करते हैं। उन्होंने कांवड़ यात्रा की परंपरा और इसके धार्मिक महत्व पर भी प्रकाश डाला। उनके मुताबिक, कांवड़िए हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्र के शिव मंदिरों में पहुंचते हैं और सावन शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
श्रद्धालुओं ने जताई गहरी आस्था
मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें बेहद शांति और सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है। कुछ महिला श्रद्धालुओं ने बताया कि शादी के बाद से ही वे लगातार इस मंदिर में दर्शन के लिए आती रही हैं। भक्तों के बीच मान्यता है कि प्राचीन कैलाश हाथीखाना मंदिर में सच्चे मन से भगवान शिव से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते सावन शिवरात्रि पर दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। सावन शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में दिनभर धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं और पूरा क्षेत्र भगवान शिव के जयकारों से गूंजता रहा।
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