Sanjay Nirupam News: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से मितव्ययी (Frugality) रहने के आग्रह पर देश की सियासत गरमा गई है। एकनाथ शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री का पुरजोर समर्थन करते हुए विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया है। निरुपम ने विपक्ष की आलोचना को ‘मानसिक विक्षिप्तता’ करार देते हुए कहा कि जब देश के सामने वैश्विक चुनौतियां हों, तब राजनीति करना अनुचित है।
प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील
बताते चले कि, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संसाधनों के संरक्षण और फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की अपील की है, तब से विपक्षी खेमे में हताशा का माहौल है। पीएम मोदी ने नागरिकों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने का सुझाव दिया है। संजय निरुपम के अनुसार, दिल्ली से मुंबई तक का समूचा विपक्ष इस नेक सलाह पर भी सवाल उठा रहा है। उन्होंने हैरानी जताई कि विपक्ष इस आर्थिक अनुशासन और भविष्य की रणनीति को समझने के बजाय सरकार को ही अर्थव्यवस्था के संकट के लिए दोषी ठहरा रहा है।
पश्चिम एशिया में युद्ध और वैश्विक आर्थिक संकट का प्रभाव
आपको बता दे कि, संजय निरुपम ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए पूछा कि क्या मिडिल ईस्ट में संघर्ष भारत ने शुरू किया है? उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और बाजार की अनिश्चितता (Global Economy and Market Uncertainty) के इस दौर में यदि दुनिया के किसी भी कोने में युद्ध होता है, तो उसका असर भारत पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि क्या वे इतने नासमझ हैं कि उन्हें युद्ध की छाया और उसके आर्थिक परिणामों का अंदाजा नहीं है। निरुपम ने जोर देकर कहा कि पीएम मोदी का आह्वान भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक पूर्व-नियोजित सुरक्षा कवच है।
प्रधानमंत्री के प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
विपक्ष द्वारा पीएम मोदी के विमान और प्रोटोकॉल पर उठाए जा रहे सवालों को निरुपम ने ‘मानसिक दिवालियापन’ बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि क्या विपक्ष चाहता है कि देश के प्रधानमंत्री पैदल चलें या अपनी कार स्वयं चलाएं (Prime Minister’s Transport and Movement)? उन्होंने आरोप लगाया कि घोर हताशा में डूबा विपक्ष प्रधानमंत्री की सुरक्षा के महत्व को कम आंकने की कोशिश कर रहा है। निरुपम ने कहा कि घर से काम करने या सार्वजनिक परिवहन के उपयोग की सलाह आम जनता के लिए ईंधन की बचत का एक माध्यम है, जिसे सुरक्षा प्रोटोकॉल से जोड़कर देखना गलत है।
विदेशी मुद्रा भंडार और ईंधन की उपलब्धता की स्थिति
संजय निरुपम ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में देश के पास डीजल और पेट्रोल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय तरलता (Forex Reserves and International Liquidity) भी संतोषजनक स्थिति में है। हालांकि, चूंकि विदेशी संस्थागत निवेशक बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, इसलिए भविष्य में किसी भी संभावित मुद्रा संकट और वित्तीय दबाव (Currency Crisis and Financial Pressure) को रोकने के लिए सोने की खरीद टालने और बचत करने का सुझाव दिया गया है। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यह चिंता केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की होनी चाहिए, लेकिन विपक्ष संकट की इस घड़ी में भी केवल अपनी राजनीति चमकाने में लगा है।










