Sandeep Pathak BJP: पंजाब की सियासत में मचे घमासान के बीच राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के लिए न्यायपालिका से राहत भरी खबर आई है। आम आदमी पार्टी (AAP) का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने वाले संदीप पाठक को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ी अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को स्पष्ट आदेश दिया है कि आगामी सोमवार, यानी 11 मई तक, अदालत की पूर्व अनुमति के बिना संदीप पाठक के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या सख्त कदम न उठाया जाए। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब पाठक पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती नजर आ रही थी।
FIR की गोपनीयता पर उठे सवाल: कोर्ट पहुंचे सांसद
संदीप पाठक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए पंजाब पुलिस और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई है कि उन्हें उनके खिलाफ दर्ज की गई कथित FIR की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाए। पाठक का कहना है कि उन्हें मीडिया और अन्य माध्यमों से पता चला है कि उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन पुलिस ने न तो उन्हें इसकी सूचना दी है और न ही FIR की कॉपियां सार्वजनिक की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना को जानबूझकर छिपाया जा रहा है ताकि उन्हें कानूनी उपचार, जैसे कि अग्रिम जमानत लेने से रोका जा सके।
पंजाब सरकार ने मांगा समय: सोमवार को होगी अगली सुनवाई
अदालत में सुनवाई के दौरान जब संदीप पाठक की याचिकाओं पर जवाब मांगा गया, तो पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए थोड़ा समय मांगा। राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि वे सोमवार तक पूरी जानकारी जुटाकर यह स्पष्ट कर देंगे कि संदीप पाठक के खिलाफ वास्तव में कितनी और कहां-कहां FIR दर्ज की गई हैं। कोर्ट ने सरकार के इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए सोमवार तक का समय दिया है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि इस अवधि के दौरान सांसद की सुरक्षा और स्वतंत्रता बरकरार रहे।
दल-बदल के बाद ‘वेंडेटा पॉलिटिक्स’ के आरोप
संदीप पाठक उन सात राज्यसभा सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में आम आदमी पार्टी से नाता तोड़कर बीजेपी में विलय कर लिया था। इस राजनीतिक दलबदल के तुरंत बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर धाराओं में मामले दर्ज होने की खबरें सामने आईं। बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने इसे पूरी तरह से ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ (Political Vendetta) करार दिया है। समर्थकों का तर्क है कि जब तक संदीप पाठक ‘आप’ के रणनीतिकार थे, तब तक वे बेदाग थे, लेकिन पाला बदलते ही वे पुलिस के निशाने पर आ गए।
भविष्य की राह: सोमवार का दिन होगा बेहद अहम
अब सबकी निगाहें 11 मई, सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन पंजाब सरकार को कोर्ट के सामने फाइल रखनी होगी कि संदीप पाठक पर लगे आरोप क्या हैं और क्या वास्तव में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत मौजूद हैं। यदि सरकार FIR की पुष्टि करती है, तो संदीप पाठक के पास कानूनी विकल्पों का रास्ता खुल जाएगा। फिलहाल, हाई कोर्ट के इस ‘स्टे’ ने उन्हें एक बड़ी तात्कालिक सुरक्षा प्रदान कर दी है, जिससे उनके समर्थकों और बीजेपी खेमे में राहत की लहर है। यह मामला आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा और दशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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