Sambhal Violence Case: संभल हिंसा केस में जज विभांशु सुधीर का तबादला, अखिलेश यादव ने न्यायपालिका स्वतंत्रता पर सवाल उठाया

क्या संभल हिंसा केस की निष्पक्ष सुनवाई अब मुमकिन है? सिविल जज विभांशु सुधीर के अचानक हुए तबादले ने कानूनी गलियारों से लेकर लखनऊ की सियासत तक हड़कंप मचा दिया है। अखिलेश यादव ने इसे न्यायपालिका को डराने की कोशिश बताया है। आखिर इस तबादले के पीछे का असली खेल क्या है?

Sambhal Violence

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 21, 2026

Sambhal Violence Case: संभल हिंसा मामले में जिस जज ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, उनका तबादला कर दिया गया है। केंद्रीय न्यायिक पदाधिकारी सीजेएम विभांशु सुधीर को अब सुल्तानपुर में पोस्ट किया गया है। खास बात यह है कि उन्हें सीजेएम की जिम्मेदारी से हटाकर सिविल जज (सीनियर डिविजन) का पद दिया गया है। इस कदम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि यह केवल ट्रांसफर है या उनके साथ डिमोशन हुआ है।

अखिलेश यादव का तीखा बयान

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “सत्य का स्थान कभी स्थानांतरित नहीं होता, वह अचल रहता है।” उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन सीधे लोकतंत्र का हनन है। अखिलेश ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्र न्यायपालिका ही संविधान की सुरक्षा कर सकती है और ऐसे फैसलों से लोकतंत्र कमजोर होता है।

विभांशु सुधीर ने पुलिस पर एफआईआर का आदेश दिया था

सीजेएम विभांशु सुधीर ने शाही मस्जिद बवाल मामले में सख्ती दिखाते हुए ASP और संभल के पूर्व CO अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश 9 जनवरी को जारी हुआ था। उनका यह फैसला कई लोगों के लिए आश्चर्यजनक था और इसने राजनीतिक चर्चा को भी बढ़ावा दिया।

तबादला आदेश के बाद मामला गरमाया

एफआईआर का आदेश आने के तुरंत बाद ही विभांशु सुधीर का तबादला कर दिया गया। इस फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों और न्यायिक circles में बहस तेज हो गई। कई लोग इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने वाला कदम मान रहे हैं।एफआईआर के आदेश के बावजूद संभल के वर्तमान एसपी ने इसे चुनौती देने का ऐलान किया। संभल के एसपी ने कहा कि पुलिस अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दायर की जाएगी और FIR दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है।

न्यायपालिका और प्रशासन के बीच टकराव

इस घटना ने न्यायपालिका और प्रशासन के बीच टकराव को भी उजागर किया है। सीजेएम विभांशु सुधीर का आदेश कानूनी रूप से वैध था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे चुनौती दी गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायिक फैसलों और सरकारी आदेशों के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है।

नए सीजेएम की नियुक्ति

इस पूरे मामले में संभल के नए सीजेएम के रूप में सिविल जज आदित्य सिंह को नियुक्त किया गया है। उन्होंने संभल में न्यायिक जिम्मेदारियों को संभालना शुरू कर दिया है। इस बदलाव के साथ ही अब क्षेत्रीय न्याय व्यवस्था में नए नाम और नए अधिकारी सामने आए हैं।संभल हिंसा मामले में एफआईआर का आदेश और उसके बाद विभांशु सुधीर का तबादला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और प्रशासनिक हस्तक्षेप पर नए सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक प्रतिक्रिया, प्रशासनिक चुनौती और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाना भविष्य में महत्वपूर्ण होगा।

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