RJD Leader Shivchandra Ram Resigns: बिहार की राजनीति में सोमवार, 8 जून 2026 का दिन आरजेडी के लिए एक बड़ा राजनीतिक भूचाल लेकर आया। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने आरजेडी से अपना नाता तोड़ लिया है। पार्टी छोड़ते वक्त उनका दर्द साफ झलका और वे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फूट-फूटकर रो पड़े। यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब बिहार में एमएलसी (विधान परिषद) चुनाव की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं, जिससे लालू यादव की पार्टी के लिए यह एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
एमएलसी टिकट न मिलने से उपजी नाराजगी
शिवचंद्र राम के इस्तीफे के पीछे का मुख्य कारण बिहार विधान परिषद चुनाव में टिकट न मिलना माना जा रहा है। आरजेडी ने इस चुनाव के लिए सुनील सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जिन्होंने सोमवार को अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। इस घटनाक्रम से शिवचंद्र राम काफी आहत थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भावुक होकर कहा कि 1990 से वे आरजेडी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे और पार्टी की हर नीति व निर्देश का ईमानदारी से पालन किया। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को सम्मान देने के लिए धन्यवाद तो कहा, लेकिन साथ ही उन्होंने अपने साथ हुए ‘धोखे’ का भी जिक्र किया।
“मेरे साथ हुई नाइंसाफी”: फूट-फूटकर रोए पूर्व मंत्री
मीडिया के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए शिवचंद्र राम ने कहा, “आरजेडी ने मुझे सम्मान दिया, इसके लिए मैं आभारी हूं, लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से मैंने अपनी जिंदगी जैसे बिताई है, उसे बयां नहीं कर सकता।” यह कहते ही वे फफक कर रो पड़े। उन्होंने आगे कहा कि उनके साथ सरासर नाइंसाफी हुई है। उन्होंने बताया कि उनके समाज के हजारों लोग पिछले तीन दिनों से पटना में आकर ठहरे हुए थे, जो उनकी उम्मीदवारी को लेकर उत्साहित थे, लेकिन टिकट न मिलने से वे सभी बेहद आहत और निराश हैं।
सभी पदों से इस्तीफा, राजनीति पर अभी सस्पेंस
इस घटनाक्रम में शिवचंद्र राम ने आरजेडी के एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद सहित पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। हालांकि, जब उनसे भविष्य की राजनीतिक योजनाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब न देते हुए कहा कि आगे की रणनीति के बारे में वे उचित समय पर जानकारी देंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे किसी के दबाव में नहीं हैं और पार्टी छोड़ने का फैसला उनका अपना है।
शिवचंद्र राम का इस्तीफा आरजेडी के लिए एक बड़ा संकेत है। पार्टी के भीतर दलित चेहरों की नाराजगी और टिकट वितरण को लेकर बढ़ता असंतोष आगामी चुनावों में पार्टी की राह कठिन बना सकता है। उनके द्वारा लगाए गए ‘धोखे’ और ‘नाइंसाफी’ के आरोप पार्टी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या आरजेडी उन्हें मनाने में सफल होती है या बिहार की राजनीति में शिवचंद्र राम किसी नए अध्याय की शुरुआत करेंगे।










