Republic Day 2026: भारत वर्ष 2026 में अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। इस अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में झांकियां हमेशा से मुख्य आकर्षण रही हैं। ये झांकियां केवल सजावट नहीं होतीं, बल्कि वे देश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक उपलब्धियों और विकास की तस्वीर पेश करती हैं। राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मंत्रालयों की झांकियां भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक बनकर सामने आती हैं।
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झांकियों की अहमियत
गणतंत्र दिवस परेड में प्रदर्शित झांकियां हर राज्य और विभाग की विशिष्ट पहचान को दर्शाती हैं। इनमें लोककला, परंपरा, सामाजिक संदेश और आधुनिक विकास की झलक मिलती है। इन झांकियों के माध्यम से भारत की प्रगति और सांस्कृतिक विरासत को एक सूत्र में पिरोकर जनता के सामने प्रस्तुत किया जाता है।
छह महीने पहले शुरू होती है प्रक्रिया
झांकियों के चयन की प्रक्रिया परेड से लगभग छह महीने पहले शुरू हो जाती है। रक्षा मंत्रालय सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभागों से प्रस्ताव आमंत्रित करता है। चूंकि समय और स्थान की सीमा होती है, इसलिए सभी राज्यों की झांकियों को एक साथ शामिल करना संभव नहीं होता। इसी कारण कठोर मानदंड तय किए जाते हैं ताकि केवल सर्वश्रेष्ठ झांकियां ही परेड में शामिल हों।
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गणतंत्र दिवस 2026 की थीम

हर साल परेड के लिए एक राष्ट्रीय थीम तय की जाती है। वर्ष 2026 की थीम है:
- ‘स्वावलम्बन का मंत्र – वंदे मातरम्’
- ‘समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’
इससे पहले 2025 में थीम थी ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ और 2024 में थीम थी ‘विकसित भारत’।
चयन की प्रक्रिया और समिति
रक्षा मंत्रालय झांकियों के चयन के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करता है। इसमें कला, संस्कृति, संगीत, वास्तुकला और मूर्तिकला जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं। चयन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है:
- स्केच और ब्लूप्रिंट: राज्य अपनी थीम के आधार पर स्केच भेजते हैं। समिति देखती है कि झांकी का डिजाइन आकर्षक है और संदेश स्पष्ट है या नहीं।
- 3D मॉडल का मूल्यांकन: स्केच पास होने के बाद 3D मॉडल तैयार किया जाता है। इसमें कलाकारों की प्रस्तुति, संगीत और बारीकियों पर ध्यान दिया जाता है।
- अंतिम निर्माण: 3D मॉडल को मंजूरी मिलने के बाद ही झांकी का वास्तविक निर्माण शुरू होता है।
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रोटेशन सिस्टम
भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। सभी को एक साथ शामिल करना कठिन होता है। इसलिए 2025 से रोटेशन सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत हर तीन साल में प्रत्येक राज्य को कम से कम एक बार अपनी झांकी प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाता है।
2026 की परेड की खासियत
इस बार परेड में भारतीय सेना का ‘रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स’ पहली बार एक विशेष पशु दस्ता (animal contingent) प्रदर्शित करेगा। इसमें शामिल होंगे:
- बैक्ट्रियन ऊंट
- जांस्करी पोनी (घोड़े)
- शिकारी पक्षी (raptors)
- विशेष रूप से प्रशिक्षित कुत्तों के दस्ते
ये झांकियां और पशु दस्ता परेड को और भी भव्य और आकर्षक बनाएंगे।
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