Rajasthan Politics: बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज कथित धमकी देने के मामले में एफआईआर के आधार पर आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगी। न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद इसे विचार योग्य मानते हुए राजस्थान सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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शिव थाने में दर्ज FIR को दी गई थी चुनौती
यह मामला बाड़मेर जिले के शिव थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस एफआईआर को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को गलत बताते हुए एफआईआर रद्द करने और कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।शिकायतकर्ता छोटू सिंह ने आरोप लगाया था कि 27 मार्च 2026 की रात करीब 11 बजे विधायक ने उन्हें फोन कर धमकी दी थी। शिकायत में यह भी दावा किया गया कि इसके बाद कुछ अन्य मोबाइल नंबरों से भी उन्हें और उनके भाई को फोन आए, जिनमें कथित रूप से जान-माल को नुकसान पहुंचाने और छवि खराब करने की धमकियां दी गईं।
विधायक पक्ष ने लगाए राजनीतिक साजिश के आरोप
हाईकोर्ट में विधायक रविंद्र सिंह भाटी की ओर से अधिवक्ता योगेंद्र सिंह चारण ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उनके खिलाफ दर्ज मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
विधायक पक्ष ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) और 351(3) के तहत आपराधिक धमकी के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनाते हैं। अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि कथित घटना के कई दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जिससे शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
देरी से FIR दर्ज होने के तर्क पर भी हुई चर्चा
याचिका में यह भी कहा गया कि घटना और एफआईआर दर्ज होने के बीच लगभग पांच दिनों का अंतर रहा। विधायक पक्ष ने अदालत में इस देरी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिकायत दर्ज कराने के पीछे अन्य कारण हो सकते हैं। इसके अलावा शिकायतकर्ता के बाद के व्यवहार और पूरे घटनाक्रम का हवाला देते हुए यह दावा किया गया कि मामला दबाव और राजनीतिक विरोध के चलते दर्ज कराया गया है।
हाईकोर्ट ने माना मामला सुनवाई योग्य
दोनों पक्षों की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले में विचार करने योग्य मुद्दे मौजूद हैं। इसके बाद अदालत ने एफआईआर के आधार पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार और अन्य पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
सोशल मीडिया विवाद से जुड़ा है मामला
बताया जा रहा है कि पूरा विवाद सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता छोटू सिंह का आरोप है कि एक बच्चे के वीडियो पर उनकी टिप्पणी से नाराज होकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उन्हें फोन किया और धमकी दी। इस विवाद के बाद क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद विधायक को राहत मिली है और आगे की कार्रवाई अदालत में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।
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