Jaishankar UNGA Speech: UNGA में जयशंकर का बड़ा संदेश, वैश्विक संकटों के बीच बोले- साथ आना होगा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत बहुपक्षवाद की जरूरत बताई। उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त यानी 4F संकट का जिक्र करते हुए साझा हितों वाले देशों से साथ आने का आह्वान किया।

Jaishankar UNGA Speech

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 22, 2026

Jaishankar UNGA Speech : न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म’ समिट में उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, तनाव और कई जटिल चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे माहौल में देशों के बीच सहयोग और संवाद की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।

बदलते शक्ति संतुलन पर जयशंकर की टिप्पणी

जयशंकर ने कहा कि पिछले कई दशकों से वैश्विक शक्ति संतुलन में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा था। हालांकि अब बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों ने इस बदलाव को अधिक गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि यदि इन परिस्थितियों को नियंत्रित करने के प्रयास कमजोर पड़े, तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में बहुपक्षीय व्यवस्था को प्रभावी भूमिका निभानी होगी।

शांति और विकास के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को केवल कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं बताया। उनके अनुसार, इसका सीधा संबंध वैश्विक शांति, सुरक्षा और विकास से है। जलवायु परिवर्तन, जलवायु न्याय, आतंकवाद, विकास के लिए वित्त, उभरती तकनीक, आपदा प्रबंधन और भविष्य की महामारियों से निपटने जैसे मुद्दों पर देशों के साझा प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत करना भी सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

संकटों के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई पर जोर

जयशंकर ने संघर्षों और वैश्विक संकटों से निपटने के लिए व्यावहारिक तथा लक्षित कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसी बड़े शांति समझौते की प्रक्रिया चलने के बावजूद संघर्ष से जुड़े विशिष्ट मानवीय और आर्थिक मुद्दों पर तत्काल काम किया जा सकता है। ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त से जुड़े संकटों को लंबे समय तक अनदेखा नहीं किया जा सकता। इन क्षेत्रों में सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।

नई तकनीक के लिए अंतरराष्ट्रीय गार्डरेल जरूरी

उभरती तकनीकों से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय नियम और स्पष्ट सुरक्षा ढांचे तैयार करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि नई तकनीकी क्षमताओं के साथ नए जोखिम भी सामने आ रहे हैं। इसलिए इनके इस्तेमाल को सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने के लिए उपयुक्त नियम तथा ‘गार्डरेल’ विकसित करना जरूरी है।

सप्लाई चेन में जोखिम कम करने की जरूरत

जयशंकर ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि किसी एक देश, क्षेत्र या व्यवस्था पर अत्यधिक निर्भरता संकट के समय बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे में जोखिम कम करने के लिए आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत विकसित करने और समान हित रखने वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर दिया जोर

विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद को प्रभावी बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों, नियमों और मानकों का पालन जरूरी है। केवल बहुपक्षीय व्यवस्था के समर्थन की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे व्यवहार में भी मजबूत करना होगा। इसी संदर्भ में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता बताई।

ज्यादा भागीदारी और पारदर्शिता की मांग

जयशंकर ने ‘रिफॉर्म्ड मल्टीलैटरलिज्म’ की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निर्णय प्रक्रिया में अधिक देशों की भागीदारी होनी चाहिए। साथ ही फैसले पारदर्शी तरीके से लिए जाने चाहिए। उनका कहना था कि वैश्विक व्यवस्था को बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री से मुलाकात

UNGA के दौरान जयशंकर ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मजबूत होते आर्थिक संबंधों पर चर्चा की। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के लागू होने के बाद द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग की समीक्षा भी हुई। इसके अलावा वैश्विक मुद्दों और बहुपक्षीय सहयोग पर बातचीत हुई।

नाउरू के राष्ट्रपति से भी हुई चर्चा

जयशंकर ने नाउरू के राष्ट्रपति डेविड अडियांग से भी मुलाकात की। उन्होंने प्रशांत द्वीपीय देश के साथ भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को रेखांकित किया। जयशंकर ने कहा कि भारत नाउरू के विकास में साझेदार के रूप में अपनी प्रतिबद्धता जारी रखेगा। UNGA के दौरान जयशंकर की इन बैठकों को भारत की बहुपक्षीय और द्विपक्षीय कूटनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में देखा गया।

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