Haryana News: हरियाणा के ऐतिहासिक शहर अंबाला में आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक वामन द्वादशी मेले की बहुत ही धूमधाम से शुरुआत हो गई है। यह तीन दिवसीय मेला 21, 22 और 23 सितंबर तक आयोजित किया जा रहा है। इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु और बड़ी संख्या में आम नागरिक पहुंच रहे हैं। मेले के पहले दिन से ही शहर का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्सवपूर्ण नजर आ रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किए भगवान के दर्शन

इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मेले की गरिमा को बढ़ाते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विशेष रूप से शिरकत की। मुख्यमंत्री ने वामन भगवान के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से दर्शन किए और माथा टेककर प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा। दर्शन पूजन के उपरांत मुख्यमंत्री ने मेले में मौजूद श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और बच्चों से मुलाकात की तथा उनका हालचाल जाना। उनके आगमन से मेले में उपस्थित लोगों का उत्साह और अधिक बढ़ गया, और सुरक्षा तथा व्यवस्था के कड़े प्रबंध किए गए थे।
125 साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान

अंबाला का यह वामन द्वादशी मेला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान या आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह इस शहर की सदियों पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पारंपरिक मेले के इतिहास की बात करें तो, अंबाला में इस आयोजन को होते हुए 125 साल से भी अधिक का लंबा समय बीत चुका है। पीढ़ियों से चली आ रही इस अनूठी परंपरा में शहर के कोने-कोने से लोग पूरी श्रद्धा के साथ जुड़ते चले आ रहे हैं।
तीन दिवसीय कार्यक्रमों की रूपरेखा और समापन

मेले की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार इसके अलग-अलग दिनों में विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। मेले के पहले दिन पूरी भव्यता के साथ हिंडोले विराजमान किए जाते हैं, जिनके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। दूसरे दिन विभिन्न प्रकार की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है और शाम को पूरे बाजार व पंडाल को भव्य रोशनी से जगमगा दिया जाता है। मेले के अंतिम दिन एक बेहद भव्य और आकर्षक शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसके बाद इन हिंडोलों को अंबाला के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक नवरंग राय तालाब में पूरी विधि-विधान के साथ विसर्जित किया जाता है।
इसी अंतिम जल प्रवाह के साथ तीन दिवसीय वामन द्वादशी मेले का पारंपरिक समापन होता है। अंबाला के निवासियों के लिए यह मेला अटूट आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का ऐसा अनमोल संगम है, जिसमें हर साल हर्षोल्लास के साथ सहभागिता की जाती है।










