Ration Price Hike: खाने-पीने की चीजों के दाम में उछाल, 5 महीने में कितना महंगा हुआ राशन?

राशन की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच महीनों में दाल, तेल, दूध, चीनी समेत कई जरूरी चीजों के दामों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आखिर किन सामानों की कीमत सबसे ज्यादा बढ़ी और इसके पीछे क्या वजह है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

खाने-पीने की चीजों के दाम में उछाल

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अगस्त 6, 2026

Ration Price Hike: साल 2026 में महंगाई का असर आम लोगों की रसोई तक साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ महीनों में खाने-पीने की कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर बने तनाव और आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, राशन की अधिकतर आवश्यक वस्तुओं के दामों में पिछले कुछ महीनों में वृद्धि देखने को मिली है, जिससे घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।

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रिपोर्ट में सामने आया कीमतों का बदलाव

उपभोक्ता मामले विभाग के प्राइस मॉनिटरिंग सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 से अगस्त 2026 के बीच कई प्रमुख खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट बताती है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली कई वस्तुएं पहले की तुलना में महंगी हो गई हैं। दालों से लेकर खाने के तेल, चीनी, नमक और दूध तक कई उत्पादों के दाम बढ़े हैं। इससे सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है।

दाल और तेल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी

आंकड़ों के मुताबिक, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चना दाल की कीमत में करीब 5.67 प्रतिशत, अरहर दाल में लगभग 5 प्रतिशत और उड़द दाल में करीब 4.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं मूंग और मसूर दाल के दाम भी बढ़े हैं। खाने के तेलों में सरसों तेल, सोया तेल, सूरजमुखी तेल, पाम तेल और मूंगफली तेल की कीमतों में भी तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और घरेलू उत्पादन से जुड़ी चुनौतियां इसकी बड़ी वजह हैं।

कमजोर मानसून से बढ़ी दालों की चिंता

जानकारों के अनुसार, इस साल कमजोर मानसून का असर खरीफ फसलों पर पड़ा है। दालों के उत्पादन में कमी आने से बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई है। उत्पादन कम होने के कारण आयात पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। खरीफ दालों की फसल में पिछले साल की तुलना में गिरावट आने की बात कही जा रही है, जिससे आने वाले समय में दालों के दामों पर दबाव बना रह सकता है।

त्योहारी सीजन में और बढ़ सकती है महंगाई

अगस्त महीने से देश में त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। सावन के बाद रक्षाबंधन, तीज, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। त्योहारों के दौरान खाने-पीने की चीजों की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। यदि वैश्विक परिस्थितियां और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।

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आम लोगों के बजट पर बढ़ता असर

राशन की जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से घरेलू खर्च बढ़ गया है। तेल, दाल, दूध और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के महंगे होने से परिवारों को अपने मासिक बजट में बदलाव करना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में बाजार की स्थिति और उत्पादन पर निर्भर करेगा कि महंगाई का यह दौर कितना लंबा चलता है।