Rangbhari Ekadashi 2026 in Kashi Vishwanath: बाबा विश्वनाथ के गुलाल से सराबोर होगी काशी, जानें क्यों खास है शिव-गौरा के गौने की यह रस्म

काशी में होली का उत्सव सबसे खास माना जाता है। इसकी शुरुआत रंगभरी एकादशी से होती है, जब बाबा विश्वनाथ को गुलाल अर्पित कर काशीवासी भगवान से होली खेलने की अनुमति मांगते हैं।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 26, 2026

Rangbhari Ekadashi 2026 in Kashi Vishwanath: काशी, जिसे सात वार और नौ त्योहारों का नगर कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां स्थित बाबा विश्वनाथ का मंदिर हर वर्ष दुनियाभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 27 फरवरी 2026 को काशी में रंगभरी एकादशी (आमलकी एकादशी) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन रंगोत्सव की शुरुआत होती है और बाबा विश्वनाथ को अबीर-गुलाल अर्पित किया जाएगा।

रंगभरी एकादशी को होली उत्सव की पूर्वसूचना माना जाता है। काशीवासी इस दिन बाबा विश्वनाथ को गुलाल अर्पित करते हैं और रंग खेलने की अनुमति लेते हैं। इस परंपरा की शुरुआत लगभग 360 वर्ष पहले हुई थी, और इसे विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी के परिवार से जोड़ा जाता है। यह परंपरा आज भी श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है और इसे काशी में होली से जोड़कर देखा जाता है।

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बाबा विश्वनाथ को चढ़ाया जाएगा गुलाल

Rangbhari Ekadashi 2026 in Kashi Vishwanath
गुलाल से सराबोर होगी काशी

रंगभरी एकादशी का मुख्य आकर्षण बाबा विश्वनाथ को अबीर-गुलाल चढ़ाना है। यह परंपरा न केवल धार्मिक भावना को दर्शाती है, बल्कि काशीवासियों के सांस्कृतिक जीवन का भी हिस्सा है। रंगभरी एकादशी पर काशी के मंदिरों में विशेष पूजा और शृंगार किया जाता है। श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ को गुलाल अर्पित करके अपने परिवार और गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

27 फरवरी का पर्व

ज्योतिष अनुसार, शुक्रवार 27 फरवरी को रंगभरी एकादशी रहेगी। इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन फाल्गुन शुक्ल पक्ष के दौरान हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली खेली जाती है। इसमें नागा साधु और किन्नर समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ माता गौरा के गौना के लिए उनके ससुराल आते हैं।

शिव-गौरा के गौना की परंपरा

रंगभरी एकादशी पर शिव-गौरा के गौना की अनूठी परंपरा भी निभाई जाती है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद माता पार्वती का गौना करने के लिए शिव अपने ससुराल आते हैं। इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर, तिलभांडेश्वर और गौरी केदारेश्वर मंदिरों में विशेष शृंगार और पूजा की जाती है। पालकी यात्रा भी आयोजित होती है, जो इस पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को बढ़ाती है।

रंगभरी एकादशी का सांस्कृतिक महत्व

Rangbhari Ekadashi 2026 in Kashi Vishwanath
गुलाल से सराबोर होगी काशी

रंगभरी एकादशी न केवल रंगोत्सव का प्रतीक है, बल्कि यह शिव-शक्ति के मिलन और गृहस्थ जीवन में मंगलकामना का प्रतीक भी मानी जाती है। यह पर्व श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति की भावना जगाता है। इस दिन काशी की गलियों और घाटों में श्रद्धालुओं की भागीदारी से रंग और उल्लास का माहौल बन जाता है।

इस प्रकार, 27 फरवरी 2026 को रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ मंदिर में होली उत्सव की शुरुआत होगी, बाबा विश्वनाथ को गुलाल अर्पित किया जाएगा, और शिव-गौरा के गौना की परंपरा के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव का आनंद मनाया जाएगा। यह पर्व श्रद्धालुओं और काशीवासियों के लिए अत्यंत महत्व रखता है और होली उत्सव के रंगों को विशेष बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।