Ramlala Pratishtha Divas 2026: रामलला प्रतिष्ठा दिवस 2026 गुरुवार, 22 जनवरी को अयोध्या में भव्य तरीके से मनाया जाएगा। इस दिन अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तीसरी वर्षगांठ होगी। इस अवसर पर भारत और विदेशों से लाखों भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ रामलला की पूजा में शामिल होंगे।
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प्रभु श्रीराम का बाल स्वरूप

हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता है। उन्हें धर्म और कर्तव्य का आदर्श माना जाता है। अधिकतर भक्त उन्हें शारंग धनुष और बाण लिए हुए योद्धा के रूप में देखते हैं। वहीं, उनके बाल रूप रामलला को अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, रामलला का बाल रूप शिवजी और ऋषि काकभुशुंडी से आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ माना जाता है। अयोध्या में रामलला सदियों से सर्वोच्च देवता के रूप में पूजनीय रहे हैं।
राम मंदिर का इतिहास
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि पर स्थित प्राचीन रामलला मंदिर को 16वीं शताब्दी में आक्रमणकारी बाबर द्वारा नष्ट कर दिया गया था। इसके बाद लगभग 500 वर्षों तक यह स्थल विवाद का केंद्र बना रहा। लंबे संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद आधुनिक काल में यहाँ भव्य राम मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया। यह भारतीय इतिहास के सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षणों में से एक माना जाता है।
रामलला प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त
रामलला प्राण प्रतिष्ठा के दिन कई विशेष मुहूर्त बताए गए हैं, जिनमें भक्त इस पवित्र अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
दिनांक: गुरुवार, 22 जनवरी 2026
तिथि: पौष शुक्ल पक्ष (जनवरी 2026)
संभावित मुहूर्त
सुबह 07:14 AM से 08:33 AM
सुबह 11:13 AM से 12:33 PM
दोपहर 12:33 PM से 01:53 PM
रामलला प्रतिष्ठा दिवस का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

रामलला प्रतिष्ठा दिवस को दिवाली की तरह भव्य आध्यात्मिक पर्व माना जाता है। इस अवसर पर भक्त मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, भजन और रामकथा का पाठ करते हैं। साथ ही सामुदायिक आयोजन, दान और अन्न दान का विशेष महत्व है। यह पर्व माघ मास के शुभ अवसर पर पड़ता है, जिसे सनातन धर्म में पुण्य और तप का महीना माना जाता है। इस दौरान सूर्यदेव उत्तरायण होते हैं, जो शुभता, सकारात्मकता और धर्म की प्रबलता का प्रतीक माने जाते हैं। सूर्य की यह स्थिति भक्तों में आत्मविश्वास, तेज और धर्म की शक्ति का संचार करती है। यही वजह है कि रामलला प्रतिष्ठा दिवस को केवल पूजा का दिन नहीं, बल्कि धर्म, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का उत्सव भी माना जाता है।










