Ram Mandir: अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विवाद के बीच, मंदिर के शिखर पर फहराए गए ध्वज का डिजाइन तैयार करने वाले ललित मिश्रा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। नोएडा निवासी ललित मिश्रा द्वारा लगाए गए इन आरोपों ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और उसके शीर्ष पदाधिकारियों के व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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चंपत राय पर उपेक्षा और अहंकार का आरोप
ललित मिश्रा ने एक विशेष बातचीत में दावा किया कि चंपत राय का व्यवहार मंदिर निर्माण से जुड़े लोगों और आम कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मानजनक नहीं था। मिश्रा के अनुसार, जब भी वे अपने काम के सिलसिले में चंपत राय से मिलने जाते थे, तो उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि चंपत राय को लोगों को इंतजार कराने में एक प्रकार का ‘आनंद’ मिलता था।
मिश्रा ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया, “जब ध्वज का डिजाइन तैयार हो गया और मुझे उसे दिखाने का समय मिला, तब भी मुझे 24 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।” उन्होंने आरोप लगाया कि जहां सामान्य लोगों और मंदिर के कार्यों से जुड़े व्यक्तियों की उपेक्षा की जाती थी, वहीं चंपत राय अक्सर प्रभावशाली व्यावसायिक घरानों और उद्योगपतियों के साथ तुरंत बैठकें करते थे।
‘श्रद्धा का अभाव और व्यावसायिकता का बोलबाला’
ललित मिश्रा ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि चंपत राय का पूरा ध्यान मंदिर की दिव्यता और श्रद्धा के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों पर अधिक केंद्रित था। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय अक्सर अयोध्या में होटल बनाने या दुकानों के आवंटन जैसे व्यावसायिक प्रस्तावों में लिप्त रहते थे। मिश्रा के शब्दों में, चंपत राय का अधिकांश समय उन लोगों के साथ बीतता था जो व्यापारिक लाभ की तलाश में आते थे। उन्होंने यह भी कहा कि चंपत राय के भीतर मंदिर के प्रति वह समर्पण या श्रद्धा नहीं दिखती थी जिसकी अपेक्षा एक राम भक्त करता है। अक्सर वे अपने ‘ऊंचे संपर्कों’ का हवाला देकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन करते थे।
अनिल मिश्रा पर भी सवाल
ललित मिश्रा ने ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के कामकाज पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि डॉ. अनिल मिश्रा बातचीत के दौरान शालीनता तो बरतते थे, लेकिन वे किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय को लेने के बजाय हर विषय पर लोगों को चंपत राय के पास भेज देते थे। इस प्रकार, ट्रस्ट के भीतर निर्णय लेने की एक जटिल और कष्टदायक प्रणाली बन गई थी, जिसने काम करने वालों का मनोबल गिराया।
6 जुलाई की अहम बैठक
ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक 6 जुलाई, 2026 को होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य एजेंडा मंदिर परिसर में हुई चढ़ावा चोरी की घटना के बाद उत्पन्न विवादों पर मंथन करना है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर कड़े निर्णय लिए जा सकते हैं। इस बात की भी चर्चा है कि ट्रस्ट में बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, जिसमें उनके इस्तीफे की संभावना पर भी विचार संभव है। ललित मिश्रा के ये आरोप इस बैठक की गंभीरता को और बढ़ा देते हैं।
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