Rajnath Singh: पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन दिए जाने के खिलाफ भारत ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में आयोजित एक ‘बुद्धिजीवी सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए पड़ोसी मुल्क को स्पष्ट चेतावनी दी कि अब भारत अपनी नदियों के पानी का उपयोग आतंकवाद के संरक्षकों को पोषित करने के लिए नहीं होने देगा। उन्होंने साफ कहा कि “जब तक पाकिस्तान आतंकवाद बंद नहीं करता, सिंधु जल संधि का निलंबन जारी रहेगा।”
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‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस ऐतिहासिक संकल्प को दोहराया कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।’ उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए जघन्य आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित रखा जाएगा। रक्षा मंत्री ने तल्ख लहजे में कहा, “जिनके आंसू सूख गए हैं, उन्हें हमसे पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हम सिंधु नदी का पानी मानवता के दुश्मनों और उनके आकाओं तक नहीं पहुंचने देंगे।”
संधि का निलंबन
भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर, 1960 को हुई सिंधु जल संधि दुनिया के सबसे सफल जल-बंटवारा समझौतों में से एक मानी जाती थी। लेकिन पाकिस्तान की ‘असामान्य शत्रुता’ और निरंतर आतंकी गतिविधियों ने भारत को अपनी नीति बदलने पर मजबूर किया है। भारत सरकार का स्पष्ट मानना है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय संधि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से बढ़कर नहीं हो सकती। जब तक पाकिस्तान सीमा पार से होने वाली आतंकवादी घटनाओं को पूरी तरह और विश्वसनीय ढंग से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि व्यावहारिक रूप से निलंबित ही रहेगी।
राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया को यह दिखा दिया है कि शांति की भाषा न समझने वालों को जवाब कैसे दिया जाता है।
बदलते कश्मीर की नई तस्वीर
राजनाथ सिंह ने इस दौरान एनडीए सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में बड़े और साहसी निर्णय लिए गए हैं। अनुच्छेद 370 पर उन्होंने कहा कि कभी कांग्रेस का दावा था कि इसे कोई नहीं हटा सकता, लेकिन सरकार ने इसे सफलतापूर्वक समाप्त कर कश्मीर की फिजा बदल दी है।
उन्होंने कश्मीर के कायाकल्प का विवरण देते हुए कहा, आज कश्मीर आतंकवाद की खबरों से नहीं, बल्कि पर्यटन और निवेश से चर्चा में है। दशकों बाद श्रीनगर में कृष्ण जन्माष्टमी की शोभायात्राएं निकलीं, मुहर्रम के जुलूस शांति से संपन्न हुए और सिनेमा हॉल दोबारा गुलजार हुए हैं।
श्रीनगर के लाल चौक पर गर्व से तिरंगा लहराना, इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर अब मुख्यधारा के विकास में शामिल हो चुका है।
रक्षा मंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत अब पाकिस्तान के साथ “सामान्य व्यापार या संबंधों” की अपेक्षा आतंकवाद के पूर्ण खात्मे पर जोर दे रहा है, और जल संसाधनों को एक कूटनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।
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