Rahul Gandhi protest: देशभर में फैले नीट (NEET) पेपर लीक मामले और छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर सियासी घमासान अब सीधे प्रधानमंत्री आवास तक पहुंच गया है। मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बाहर अचानक धरना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता नीट-2026 और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
इस बड़े प्रदर्शन से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर सभी वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक हुई, जिसके बाद नेताओं ने एकजुट होकर पीएम आवास की तरफ मार्च किया। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा सहित पार्टी के कई दिग्गज नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच जब कांग्रेसी नेता पीएम हाउस के नजदीक पहुंचे, तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प देखने को मिली। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने धरना दे रहे कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को जबरन हटाकर हिरासत में ले लिया।
Asaduddin Owaisi: ओवैसी का मोदी सरकार पर तीखा हमला, पुलिस कार्रवाई को बताया गलत
राहुल गांधी का तीखा हमला
प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठने के दौरान ही राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा कर केंद्र सरकार पर चौतरफा हमला बोला। राहुल गांधी ने लिखा कि वे और उनकी पार्टी कल (सोमवार) को संसद मार्च के दौरान युवा छात्रों के साथ हुई पुलिसिया बर्बरता और लाठीचार्ज का जवाब मांगने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के घर तक आए हैं।
राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाया कि मोदी सरकार करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद के भीतर इस पर किसी भी प्रकार की बहस या चर्चा कराने को तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेलने और इस गंभीर लापरवाही के लिए न केवल शिक्षा मंत्री, बल्कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को भी अपने पदों से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
सोनम वांगचुक का अनशन और संसद मार्च में हुई बर्बरता बना बड़ा मुद्दा
गौरतलब है कि नीट परीक्षा में हुई धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले करीब एक महीने से छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी था। इसी आंदोलन के समर्थन में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पिछले 23 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे थे। शनिवार की सुबह दिल्ली पुलिस ने उन्हें जबरन धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जहां अस्पताल के भीतर भी उनका अनशन लगातार जारी है।
इस प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में सोमवार को छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने ‘चलो संसद मार्च’ का आह्वान किया था। इस मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच हिंसक झड़प देखने को मिली, जिसमें पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस लाठीचार्ज में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
इस बीच, छात्र आंदोलन के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर एक मांग पत्र भी सौंपा है। इस ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन बड़ी मांगें रखी गई हैं— सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तुरंत ससम्मान रिहाई की जाए, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए और नीट विवाद व मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का उचित मुआवजा दिया जाए। इसी पृष्ठभूमि में अब कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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