
Punjab News: पीजीआई (PGI) प्रशासन ने अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके तीमारदारों से मनमाने दाम वसूलने तथा अव्यवस्था फैलाने वाले दुकानदारों और कैंटीन संचालकों पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब ओवरचार्जिंग करने, रेट लिस्ट न लगाने या खराब सामान बेचने पर जुर्माने की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया है। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों का लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है।
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पीजीआई निदेशक का सख्त संदेश: पारदर्शिता और स्वच्छता प्राथमिकता

पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों को सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर सुविधाएं मिलना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी है कि वे मरीजों की परेशानियां बढ़ाने के बजाय उनकी सुविधा का ध्यान रखें। संस्थान के भीतर उचित कीमत, स्वच्छता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है और नियमों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ओवरचार्जिंग और रेट लिस्ट न लगाने पर ₹50 हजार का जुर्माना
नए प्रावधानों के तहत अब ओवरचार्जिंग करने और दुकानों पर स्पष्ट रेट लिस्ट प्रदर्शित न करने पर जुर्माने की राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा निम्नलिखित अनियमितताओं पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बिल न देने और छूट की जानकारी न छिपाने पर जुर्माना लगेगा। कचरे के अनुचित निस्तारण और अतिक्रमण पर सीधी कार्रवाई होगी।
फायर सेफ्टी नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना भुगतना होगा।
स्वच्छता में लापरवाही पर ₹20 हजार जुर्माना
अस्पताल परिसर में स्थित कैंटीन और दुकानों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। दुकानों में गंदगी और अस्वच्छता पाए जाने पर अब 5 हजार रुपये की जगह सीधा 20 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा।
नकली या एक्सपायरी सामान बेचने पर लाइसेंस होगा रद्द

नकली, एक्सपायरी, खराब या गंदे खाद्य उत्पाद और सामान बेचने को बेहद गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे हर मामले में प्रत्येक उल्लंघन पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। गंभीर और बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों का लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त पीजीआई प्रशासन अपने स्तर पर दंडात्मक कार्रवाई करने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कानूनी मामला भी दर्ज कराएगा।
16 अक्टूबर को प्रशासनिक समिति ने की थी समीक्षा
जुर्माने की दरों में इस भारी बढ़ोतरी का फैसला 16 अक्टूबर को उपनिदेशक प्रशासन पंकज राय की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद लिया गया। समिति ने पुराने ढीले नियमों की समीक्षा करते हुए दुकानदारों को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए कड़े प्रावधानों और भारी जुर्माने की सिफारिश की थी।
पीजीआई प्रशासन का मुख्य उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को उचित दरों पर स्वच्छ, सुरक्षित और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें।
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