
Punjab News: पंजाब विधानसभा का सत्र इन दिनों कई बड़े सियासी घटनाक्रमों और हंगामे के चलते सुर्खियों में बना हुआ है। सत्र के दौरान एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पंजाब विधानसभा में ‘एसआईआर’ (SIR) के खिलाफ पेश किए गए प्रस्ताव को बहुमत के साथ पारित कर दिया गया है। इसके साथ ही पंजाब देश की ऐसी पहली विधानसभा बन गई है, जिसने एसआईआर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव पास किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में देश के भीतर लोकतंत्र को बचाना बेहद जरूरी हो गया है।
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एसआईआर और लोकतंत्र के हनन पर सीएम मान का तीखा हमला
CM भगवंत मान बोले- लोकतंत्र बचाना जरूरी
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार और चुनाव प्रणाली पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज यह तय किया जा रहा है कि देश में वोट कौन डालेगा। एसआईआर के बहाने देश भर में करीब 14 करोड़ वोट काट दिए जाने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चारों स्तंभ इस समय तानाशाही की जकड़ में आ चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब और मजदूरों को यह साबित करने के लिए परेशान किया जा रहा है कि पहले उनकी वोट थी या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी नागरिक का कीमती वोट ही काट दिया जाएगा, तो फिर तंत्र में बाकी क्या बचेगा। मान ने हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि रणनीतिक रूप से चुनाव एक साथ नहीं कराए जाते ताकि मतदाताओं का इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह किया जा सके। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों (ईडी और सीबीआई) के समय-समय पर होने वाले राजनीतिक इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। पठानकोट के एक स्थानीय भाजपा नेता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए ऐसे कड़े प्रस्ताव लाना बहुत जरूरी था, और इसकी शुरुआत पंजाब ने कर दी है।
सदन में हंगामा और सुखपाल खैरा का निलंबन

विधानसभा सत्र के दूसरे दिन की शुरुआत भारी हंगामे के साथ हुई। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने राज्य में नशे के मुद्दे और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया और नारेबाजी करते हुए सदन के बीचों-बीच आ गए।

हंगामे के बीच वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कांग्रेस विधायक सुखपाल खैरा के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। सरकार का आरोप था कि खैरा ने सदन की चेयर के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया और जानबूझकर आदेशों का उल्लंघन किया है। इसके चलते स्पीकर ने प्रस्ताव स्वीकार करते हुए सुखपाल खैरा को पंजाब विधानसभा के बाकी पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। सत्ता पक्ष के अन्य मंत्रियों ने भी कांग्रेस के रवैये की कड़ी आलोचना की।
शून्यकाल और डीएपी खाद का मुद्दा

शून्यकाल के दौरान विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने प्रदेश में नशे के बढ़ते प्रभाव और सीमाओं से आ रही अवैध खेपों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों से लेकर मौजूदा सरकार तक सभी ने दावे किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी चिंताजनक है, जिससे आम जनता में रोष है।
इसके जवाब में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पिछली सरकारों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। वहीं, कृषि से जुड़े अहम मुद्दे पर चर्चा करते हुए कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में डीएपी खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है। कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार सख्त कदम उठा रही है। लगातार विरोध के बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
अबोहर हत्याकांड और परिजनों का धरना
विधानसभा परिसर के बाहर भी राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। अबोहर के चर्चित अजय हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर मृतक की मां और परिजनों ने लगातार दूसरे दिन विधानसभा के बाहर धरना दिया। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को समर्थन दिया। परिजनों का आरोप है कि गत 27 सितंबर को अजय को गोली मारी गई थी और 19 अक्टूबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला है।
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