
Punjab News: पंजाब के मानसा जिले में चर्चित एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के मामले में सरकार और प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस सनसनीखेज कत्ल कांड के बाद से लगातार विरोध प्रदर्शन और न्याय की मांग कर रहे मृतक के परिवार को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने संबंधित सब डिवीजन डीएसपी (DSP) और ड्रग इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है। पीड़ित परिवार शुरू से ही इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा था, जिसके बाद अब प्रशासनिक स्तर पर यह बड़ा कदम उठाया गया है।
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DSP और ड्रग इंस्पेक्टर निलंबित

परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में लापरवाही और मिलीभगत के आरोपों के चलते शासन ने प्रशासनिक स्तर पर गाज गिराई है। सरकार ने मानसा के संबंधित सब डिवीजन डीएसपी हरजिंदर सिंह गिल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है। परिवार का आरोप था कि यदि ये अधिकारी समय रहते सख्त कदम उठाते और अवैध मेडिकल स्टोरों पर लगाम कसते, तो यह अनहोनी टल सकती थी। निलंबन के बाद इस मामले में विभागीय और प्रशासनिक जवाबदेही तय होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सीबीआई (CBI) ने अपने हाथ में ली मामले की जांच
इस हाई-प्रोफाइल हत्या मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। सीबीआई से जुड़े सूत्रों ने पुष्टि की है कि एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर इस केस की फाइल अपने हाथों में ले ली है और तेजी से आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सीबीआई के अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि मानसा और आसपास के इलाकों में प्रतिबंधित और नशे की लत लगाने वाले साइकोट्रोपिक पदार्थ केमिस्ट की दुकानों पर खुलेआम और अवैध रूप से कैसे बेचे जा रहे थे। जांच एजेंसी यह भी खंगाल रही है कि इस अवैध नशे के कारोबार में स्थानीय स्तर पर किस-किस की संलिप्तता थी और किन प्रशासनिक कमियों के कारण ड्रग माफिया बेखौफ होकर अपनी गतिविधियां चला रहे थे।
गोली मारकर की गई थी परविंदर सिंह झोटा की हत्या

बीती 13 अक्टूबर को पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ लगातार मुहिम चलाने वाले एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। परविंदर सिंह इलाके में मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित और नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाते थे। सोशल मीडिया पर ‘झोटा’ के नाम से लोकप्रिय परविंदर एंटी-ड्रग टास्क फोर्स से भी जुड़े हुए थे। उनके इस जन-जागरूकता अभियान के कारण कई स्थानीय ग्राम पंचायतों ने भी नशे के खिलाफ कड़े प्रस्ताव पारित किए थे, जिससे ड्रग तस्करों में हड़कंप मचा हुआ था।
गृह मंत्री अमित शाह ने परिवार से की थी मुलाकात

इस हत्याकांड के तूल पकड़ने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हचलच मच गई थी। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा पहुंचकर शोक संतप्त पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाते हुए दोषियों को कड़े से कड़ा दंड दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने का वादा किया था। गृह मंत्री के आश्वासन के बाद अब इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी के पास पहुंच चुकी है, जिससे न्याय की उम्मीदें और अधिक मजबूत हो गई हैं।











