
Punjab News: पंजाब की सियासत में एक बार फिर बड़े राजनीतिक फेरबदल के संकेत मिलने लगे हैं। राज्य में आगामी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक ताज़ा बयान ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाओं को जोरदार हवा दे दी है। अमित शाह के इस बयान के बाद से राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है कि क्या दोनों पुराने सहयोगी दल फिर से हाथ मिलाने जा रहे हैं।
अमित शाह के बयान के बाद सियासी हलचल तेज

दिल्ली में यमुना नदी की सफाई के उद्देश्य से करीब 8,941 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि इस बार पंजाब में एनडीए (NDA) की सरकार बनने जा रही है। इससे पहले जब अमित शाह पंजाब दौरे पर थे, तब उन्होंने वहां भारतीय जनता पार्टी के दम पर सरकार बनाने की बात कही थी, लेकिन इस बार उनके मुंह से ‘एनडीए की सरकार’ का जिक्र होना कई बड़े सियासी संदेश दे रहा है।
अब तक राज्य इकाई के स्तर पर भाजपा यही कहती आई है कि वह पंजाब में अकेले ही आगामी चुनाव लड़ेगी और अपने दम पर मजबूत विकल्प पेश करेगी। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा ‘एनडीए’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने के बाद से यह माना जा रहा है कि किसान आंदोलन के दौरान साल 2020 में एक-दूसरे से अलग हुए शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के बीच पर्दे के पीछे दोबारा गठबंधन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक दोनों ही पार्टियों के किसी भी बड़े नेता की तरफ से इस मोर्चे पर कोई आधिकारिक पुष्टि या घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि धुएं के बिना आग नहीं उठती।
किसान आंदोलन के साये में टूटा था पुराना नाता

गौरतलब है कि भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का गठबंधन देश के सबसे पुराने और मजबूत राजनीतिक गठजोड़ों में से एक था, जो दशकों तक कायम रहा। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के कड़े विरोध के चलते साल 2020 में अकाली दल ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था और गठबंधन से अलग हो गई थी।
इसके बाद से पंजाब के चुनावी मैदान में भाजपा और अकाली दल ने हमेशा अलग-अलग ही चुनाव लड़ा, जिसका खामियाजा दोनों ही दलों को भुगतना पड़ा और चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा। पिछले लगभग 6 वर्षों से दोनों ही दल पंजाब की राजनीति में अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने और खोया हुआ जनाधार वापस पाने की कवायद में जुटे रहे हैं। यदि अब दोनों दल किन्हीं समीकरणों के तहत दोबारा साथ आते हैं, तो यह 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के पूरे राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह बदलकर रख सकता है।
विपक्ष पर तीखा हमला और अकाली दल पर चुप्पी

अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी जमकर निशाना साधा और तीखे हमले किए। उन्होंने आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी विभिन्न मुद्दों पर कटघरे में खड़ा किया।
खास बात यह रही कि अपने इस पूरे भाषण के दौरान अमित शाह ने एक बार भी सीधे तौर पर अकाली दल का नाम नहीं लिया। यहां तक कि जब वह हाल ही में पंजाब के दौरे पर थे, तब भी उन्होंने अकाली दल या उसके प्रमुख सुखबीर सिंह बादल को लेकर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अकाली दल के प्रति यह रणनीतिक ‘मौन’ और नरमी भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलाव और गठबंधन की जमीन तैयार करने का स्पष्ट संकेत हो सकता है।
दूसरी ओर, बीते दिनों अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और उनकी पत्नी सह सांसद हरसिमरत कौर बादल के बयानों में भी ऐसे ही कुछ राजनीतिक संकेत देखने को मिले थे। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में दोनों दल इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।
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