झारखंड के जंगलों में अफीम की खेती रोकने की तैयारी, वन विभाग ने बढ़ाई तकनीकी निगरानी

 रांची राज्य के जंगलों में अफीम की खेती रोकने के लिए वन विभाग ने शुरुआती चरण से ही निगरानी तेज कर दी है। अक्टूबर-नवंबर में अफीम के पौधे लगाने के लिए खेत तैयार किए जाते हैं। विभाग ने ज्योग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से तस्वीरें लेकर वन भूमि पर अतिक्रमण का आकलन किया है। इसमें कमी देखी गई है। पिछले वर्ष वनक्षेत्र बताई गई कुछ जमीन का विश्लेषण करने पर वह रैयती भूमि पाई गई थी। फिलहाल ड्रोन फुटेज और मानवीय पहल से वन क्षेत्र की निगरानी हो रही है। इससे वन भूमि की अवैध कटाई कर खेत बनाने और अफीम

Wrriten By :

Editor

Published On :

अक्टूबर 23, 2026

Advertisements
728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

 रांची
राज्य के जंगलों में अफीम की खेती रोकने के लिए वन विभाग ने शुरुआती चरण से ही निगरानी तेज कर दी है।

अक्टूबर-नवंबर में अफीम के पौधे लगाने के लिए खेत तैयार किए जाते हैं। विभाग ने ज्योग्राफिक इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से तस्वीरें लेकर वन भूमि पर अतिक्रमण का आकलन किया है। इसमें कमी देखी गई है।

पिछले वर्ष वनक्षेत्र बताई गई कुछ जमीन का विश्लेषण करने पर वह रैयती भूमि पाई गई थी। फिलहाल ड्रोन फुटेज और मानवीय पहल से वन क्षेत्र की निगरानी हो रही है।

इससे वन भूमि की अवैध कटाई कर खेत बनाने और अफीम उगाने पर रोक लगाने में मदद मिली है। वन एवं पर्यावरण विभाग स्थानीय पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर अफीम की खेती को शून्य स्तर पर लाने का प्रयास कर रहा है। वन भूमि से सटे रैयती क्षेत्र में भी खेती की आशंका होने पर संबंधित एजेंसियों को सूचना दी जा रही है।

728x90-Pension-Mission-Shakti-Digital

18 जिलों में निगरानी, खेती सिमटी
विभाग अफीम की खेती वाले 18 जिलों में निगरानी कर रहा है। 2024-2025 में खेती घटकर 5 हजार एकड़ रह गई थी, जबकि पहले यह 25 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में होती थी।

इस वर्ष शुरुआत से निगरानी बढ़ाने के कारण खेती कुछ सौ एकड़ तक सीमित रहने की संभावना है। इसके बाद पुलिस, प्रशासन और केंद्र सरकार की एजेंसियां सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से तैयार पौधों को भी नष्ट करेंगी।

अफीम की खेती रोकने के लिए विभाग ने तकनीकी निगरानी बढ़ाई है। जीआइएस मैपिंग से वन भूमि पर अतिक्रमण की जानकारी मिलती है और कार्रवाई की जाती है। पिछले साल कुछ रैयती भूमि को भी वनभूमि बताया गया था। हमारा प्रयास है कि अफीम की खेती शून्य स्तर पर पहुंचे।
–
श्रीकांत वर्मा, वन प्रमंडल पदाधिकारी, रांची