Punjab News: पंजाब के विभिन्न हिस्सों में बिजली कटौती (Power Cuts) को लेकर जनरोष उफान पर है। उमस भरे मौसम और लंबे पावर कट से बेहाल किसान, उद्योगपति और विपक्षी दल सड़कों पर उतर आए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए भगवंत मान सरकार ने डैमेज कंट्रोल करते हुए पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक (CMD) आईएएस बसंत गर्ग को पद से हटा दिया है। उनकी जगह गुरकीरत किरपाल सिंह को नया सीएमडी बनाया गया है।
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रिकॉर्ड तोड़ मांग और उत्पादन का गणित

सोमवार को पंजाब में बिजली की डिमांड ने इस सीजन का ऊपरी दबाव महसूस किया। बिजली की मांग 17,405 मेगावाट के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई (इससे पहले 18 जुलाई को 17,452 मेगावाट की सर्वाधिक मांग दर्ज हुई थी)। इतनी भारी मांग के बीच लगभग 1,478 मेगावाट की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई। रोपड़, लहरा मोहब्बत और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट्स की कुछ यूनिट्स कम क्षमता पर चलीं, वहीं जलस्तर की कमी से हाइडल (जलविद्युत) की 5 इकाइयां पूरी तरह बंद रहीं। पावरकॉम के दावों के बावजूद धरातल पर संकट गहराया रहा।
जगह-जगह उग्र प्रदर्शन और राजनीतिक टकराव

विभिन्न जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा और प्रशासन को शक्ति का प्रयोग करना पड़ा। पावरकॉम मुख्यालय का घेराव करने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अन्य नेताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन (पानी की बौछारें) का इस्तेमाल किया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। जगरांव में किसानों ने 4 घंटे के धरने के बाद जगरांव-जालंधर हाईवे जाम किया। फरीदकोट में पावरकॉम कार्यालय का घेराव हुआ।
डाइंग उद्योगपतियों ने वर्धमान चौक पर लुधियाना-चंडीगढ़ रोड जाम किया। उनका आरोप था कि रोजाना 14 घंटे के कट लग रहे हैं, जिससे उत्पादन चौपट हो रहा, मजदूर फैक्टरी छोड़ रहे हैं, टैरिफ 8 से बढ़कर 9.50 रुपये प्रति यूनिट हो गया है और फैक्टरी बिल 15 लाख से उछलकर 18 लाख रुपये पहुंच गया है।
सरकार का पक्ष और ‘संकट समाप्ति’ का दावा

विपक्ष और जनता के हमलों के बीच ऊर्जा मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने मोर्चा संभाला। मंत्री ने दावा किया कि 13 सितंबर की सुबह 7 बजे के बाद से बिजली कमी के कारण कोई कट नहीं लगा है; शहरी, ग्रामीण, वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध आपूर्ति मिल रही है। दो निजी थर्मल प्लांट्स की खराबी सुधारी गई है, एक प्लांट से 100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिल रही है, तथा किसानों को 8 के बजाय 10 घंटे सिंचाई बिजली दी जा रही है। संकट के लिए उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा कोयले की आपूर्ति घटाने और पंजाब के कोटे की ~1,000 मेगावाट बिजली न मिलने को जिम्मेदार ठहराया।
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