Ayodhya News: राम मंदिर CEO चयन विवाद में नया मोड़, राजेश पांडेय ने खोला बयान का राज

राम मंदिर CEO चयन विवाद के बीच पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने टॉप-3 उम्मीदवारों में अपना नाम होने और रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू में शामिल न होने के दावों को खारिज किया। राजेश पांडेय ने कहा कि उनके बयान को मीडिया और सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में पेश किया गया।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

सितम्बर 15, 2026

Ayodhya News: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े CEO चयन विवाद को लेकर चल रही चर्चा के बीच पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। सोमवार को आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने राजेश पांडेय के एक पॉडकास्ट का हवाला देते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया।

राजेश पांडेय बोले- मेरे बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया

आपको बता दे कि, विवाद बढ़ने के बाद राजेश पांडेय ने सोशल मीडिया पोस्ट और पॉडकास्ट के वीडियो क्लिप साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके बयान को मीडिया और सोशल मीडिया पर गलत तथा भ्रामक संदर्भ में पेश किया जा रहा है। राजेश पांडेय ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह आधिकारिक दावा नहीं किया कि उनका नाम राम मंदिर के CEO पद के लिए चुने गए शीर्ष तीन उम्मीदवारों में शामिल था।

टॉप-3 उम्मीदवारों में नाम होने का दावा नहीं किया

बताते चले कि, राम मंदिर CEO पद के उम्मीदवारों को लेकर राजेश पांडेय ने कहा कि पॉडकास्ट में उन्होंने यह बात स्पष्ट रूप से बताई थी कि उन्हें ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। टॉप-3 में अपना नाम होने की चर्चा उन्हें समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली थी। ऐसे में उनके बयान को आधिकारिक चयन प्रक्रिया से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को आधार बनाकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना भ्रामक है।

जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू को लेकर भी राजेश पांडेय ने किया खंडन

सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू को लेकर सामने आई चर्चाओं पर भी राजेश पांडेय ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है कि जितेंद्र मिश्रा इंटरव्यू देने आए ही नहीं थे। राजेश पांडेय के मुताबिक, उन्होंने केवल अपने इंटरव्यू स्लॉट के दौरान जितेंद्र मिश्रा को वहां नहीं देखा था। उन्होंने यह नहीं कहा था कि जितेंद्र मिश्रा का इंटरव्यू हुआ ही नहीं।

11 अगस्त के इंटरव्यू स्लॉट का दिया संदर्भ

राजेश पांडेय ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि 11 अगस्त को जिस समय उनका इंटरव्यू स्लॉट निर्धारित था, उस दौरान उन्होंने सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को वहां मौजूद नहीं देखा था। उनके मुताबिक, इस व्यक्तिगत अनुभव का अर्थ यह निकालना गलत है कि जितेंद्र मिश्रा का इंटरव्यू लिया ही नहीं गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावे को फेक और भ्रामक बताया।

अमिताभ ठाकुर के पत्र से गरमाया राम मंदिर CEO चयन मामला

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यह पूरा मामला उस समय सुर्खियों में आया जब आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने राजेश पांडेय के पॉडकास्ट का हवाला देते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने CEO पद की चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि यदि जितेंद्र मिश्रा टॉप-16 उम्मीदवारों में शामिल नहीं थे और कथित तौर पर इंटरव्यू में भी नहीं आए थे, तो उनका चयन किस आधार पर किया गया।

राजेश पांडेय की सफाई के बाद विवाद में आया नया मोड़

अमिताभ ठाकुर के पत्र के बाद राम मंदिर CEO चयन प्रक्रिया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। हालांकि, अब राजेश पांडेय की ओर से सामने आकर दोनों प्रमुख दावों को खारिज किए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। उन्होंने अपने बयान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके पॉडकास्ट को अधूरे संदर्भ में पेश किया गया।

CEO चयन प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण

फिलहाल विवाद का केंद्र श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की CEO चयन प्रक्रिया और उससे जुड़े बयानों की व्याख्या है। राजेश पांडेय के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट है कि उनके द्वारा टॉप-3 में नाम होने या जितेंद्र मिश्रा के इंटरव्यू में शामिल नहीं होने का कोई आधिकारिक दावा नहीं किया गया था। ऐसे में अब पूरे मामले को उनके मूल बयान और उसके संदर्भ के साथ देखना अहम हो गया है।